हिफाजत श्रृष्टि के वन्य जीवों की दिल से

कहते हैं ईश्वर हर जगह उपस्थित हैं पर दिखाई नहीं देते।
मेरा मानना है कि ईश्वर प्रकृति के रूप में अपने आप को परिभाषित करते रहते हैं प्रकट करते रहते हैं बस हममें वह दृष्टि होनी चाहिए जो उनकी प्रकृति के लिए उनके कार्य करने के अंदाज को देख सकें। दिल्ली मॉर्निंग वॉल्कर्स एसोसिएशन एवं प्रर्यावरण प्रहरी की सहयोगी संस्था
हिफाजत की संचालिका श्रीमती प्रतिमा वीरमानी जी न केवल एक प्रतिष्ठित रंगमंच कलाकार व ख्यातिप्राप्त सीरियल की अभिनेत्री हैं अपितु अपनी अभिनेत्री सुपुत्री सुश्री जयति वीरमानी व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर बेसहारा और बेजुबान कुत्तों की देखभाल करती हैं साथ ही बेसहारा गाय, भैंस, बकरी, चिड़ियों, पखेरूओं आदि के लिए भी इनके मन में उतनी ही पीड़ा और तड़प है जैसे कोई अपने को परेशान देखे तो उसे होती है।
एक लंबे समय से पहले तो अन्य संस्थाओं के साथ जुड़कर और व्यक्तिगत स्तर पर तथा अब हिफाजत संस्था के माध्यम से इन बेजुबान जीवों की रक्षा एवं देखभाल के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तत्पर रहती हैं, ईश्वर ही इतने मनोयोग से अपनी प्रकृति की रक्षा के लिए तत्पर रहता है और अपने प्रतिनिधियों को श्रृष्टि के संचालन के लिए दायित्व निर्धारित करके भेजता है।
गौरी शंकर मंदिर डीडीए पार्क में एक ऐसी ही बेसहारा भारतीय नस्ल की कुत्तिया को जो गर्भवती थी व भूख-प्यास से मारी- मारी फिर रही थी श्रीमती वीरमानी ने सहारा दिया और उसके लिए दवा एवं समुचित भोजन का इंतजाम करने के साथ-साथ उसकी देखभाल की भी व्यवस्था का दायित्व लिया, इस परित्यक्त पशु ने सात बच्चों को जन्म दिया और सभी बच्चों की समुचित देखभाल एवं संतुलित आहार के कारण यह बच्चे और मां स्वस्थ हैं।
भारतीय परिवेश देशी प्रजाति के कुत्ते पूर्णतया उपयुक्त होते हैं लोगों में धारणा है कि बाहर की प्रजाति के कुत्तों को भारत में लाया जाए ऐसे महानुभाव इसे स्टेटस सिंबल समझते हैं पर हम सब का मानना है कि भारतीय नस्ल के कुत्ते ना केवल स्वामी भक्त होते हैं बल्कि उनके पालन पोषण की बहुत अधिक जिम्मेदारी नहीं उठानी पड़ती अतः इनका संरक्षण करना चाहिए।
प्रतिमा वीरमानी जी प्रकृति के जीवों की सेवा के लिए निश्चित ही साधुवाद की पात्र हैं इनका यह आचरण अनुकरणीय और सराहनीय है सभी को मिलकर प्रकृति के जीवो के लिए अपनी उदारता का परिचय देना चाहिए।

