Fri. May 22nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

चीन के टीकों में बचाव दर बहुत ज्यादा नहीं,कोरोना वायरस संक्रमण रोधी टीके कम असरदार

 

बीजिंग।

चीन के शीर्ष रोग नियंत्रण अधिकारी ने कहा है कि देश के कोरोना वायरस संक्रमण रोधी टीके कम असरदार हैं और सरकार इन्हें असरदार बनाने पर विचार कर रही है।
चीन के रोग नियंत्रण केन्द्र के निदेशक गाओ फू ने चेंगदू शहर में एक संगोष्ठी में कहा कि चीन के टीकों में बचाव दर बहुत ज्यादा नहीं है। गाओ का यह बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब बीजिंग ने अन्य देशों को टीकों की करोड़ों खुराके दी हैं और पश्चिमी देशों के टीकों के प्रभावी होने पर संशय पैदा करने और बढ़ावा देने की भी वह लगातार कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि अब इस बात पर गंभीरता से विचार हो रहा है कि क्या हमें टीकाकरण प्रक्रिया के लिए अलग-अलग टीकों का इस्तेमाल करना चाहिए।

ब्राजील के शोधकर्ताओं ने चीन की टीका निर्माता कंपनी सिनोवैक के संक्रमण रोधी टीकों के असरदार होने की दर लक्षण वाले संक्रमण से बचाव में 50.4 प्रतिशत पाई। वहीं इसके मुकाबले फाइजर द्वारा बनाए गए टीके 97 प्रतिशत असरदार पाए गए। गौरतलब है कि चीन ने अपने देश में किसी अन्य देश के टीके के इस्तेमाल को अभी मंजूरी नहीं दी है।

यह भी पढें   लायन्स क्लब के नये पदाधिकारियों का हुआ गठन

गाओ ने टीके के संबंध में रणनीति पर किसी तरह के बदलाव के ब्योरे तो नहीं दिए लेकिन उन्होंने ‘एमआरएनए’ का जिक्र किया। यह प्रयोग की एक तकनीक है जिसका इस्तेमाल पश्चिम देशों के टीका निर्माता करते हैं, वहीं चीन के दवा निर्माता पारंपरिक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को उन लाभ के बारे में विचार करना चाहिए, जो एमआरएनए टीके मानव जाति को पहुंचा सकते हैं। हमें सावधानी से उसका अनुसरण करना चाहिए और केवल इसलिए उसकी उनदेखी नहीं करनी चाहिए क्योंकि हमारे पास पहले से ही अनेक प्रकार के टीके हैं।

यह भी पढें   प्रचण्ड ने जताई सरकार के कार्यशैली के प्रति अपनी असंतुष्टि

गाओ ने ये बयान शनिवार को दिया था जबकि इसके एक ही दिन बाद वो अपने बयानों से पलटते हुए दिखाई दिए। ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक उन्‍होंने कहा कि उनके बयान को समझने में मीडिया नाकाम रही। उन्‍होंने ऐसा कुछ नहीं कहा था, जिस पर स्‍वदेशी वैक्‍सीन की कारगरता पर सवाल उठाए जाएं। आपको बता दें कि ग्‍लोबल टाइम्‍स चीन की सरकार का मुखपत्र है। गाओ के बयान के बाद इस अखबार के साथ हुए उनके इंटरव्‍यू में गाओ ने कहा कि दुनियाभर के विशेषज्ञ वैक्‍सीन की कारगरता को लेकर बात कर रहे थे। उन्‍होंने इस दौरान केवल अपना साइंटिफिक विजन पेश किया था। उनका कहने का अर्थ केवल यही था कि वैक्‍सीन की कारगरता को और अधिक बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए ही उन्‍होंने अलग-अजग वैक्‍सीन लगाने की भी सलाह दी थी।

यह भी पढें   रुस के राष्ट्रपति पुतिन पहुँचे चीन

उन्‍होंने इस इंटरव्‍यू में कहा कि दुनियाभर में विकसित की गई कोरोना वैक्‍सीन की कारगरता की बात करहें तो कुछ का कम और कुछ की कम है। इसको बढ़ाने के सवाल पर वैज्ञानिक विचार कर रहे थे। इसी दौरान उन्‍होंने अपना विचार पेश किया था। ग्‍लोबल टाइम्‍स के मुताबिक गाओ इस बात को लेकर दुखी थे कि मानव सभ्‍यता को पहली बार कोविड-19 महामारी से दो-चार होना पड़ रहा है। यही वजह है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक इसकी वैक्‍सीन को लेकर शोध कर रहे हैं। सभी वैज्ञानिक इसको विकसित करने के लिए सभी नियमों का पालन कर रहे हैं। उन्‍होंने ये भी कहा है कि भविष्‍य में यदि हमें वैक्‍सीन में सुधार करने हैं तो इसके लिए हमें वायरस और वैक्‍सीन पर लगातार शोध करते रहना होगा।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *