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फ़िल्म भी बन जाएगी,पहले ज़िन्दगी बचे : फ़िल्मकार जलज

 

फ़िल्मकार आदित्य वर्मा ‘जलज’ आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। फ़िल्म निर्माण के साथ,हर आपदा में लोगों की सहायता करना,
उनकी हर संभव मदद करना,जलज जी की दिनचर्या में शामिल है।
कोरोना पर आधारित ” क़ुदरत एक प्रेम कथा” की शूटिंग स्टार्ट कर दी गई थी परन्तु आज देश में मौत का तांडव हो रहा है,देश रो रहा है,चारों तरफ लाशों का मंजर है,जलज जी बहुत दुःखी होकर बताते हैं,कि अगर जिन्दगी रही तो फ़िल्म भी बन जाएगी और शूटिंग बंद करके,लोगों को सहायता करने में जुट गए हैं,साथ में अपनी टीम से कई लोगों का सहयोग भी ले रहे हैं-डॉ. इमरान,डॉ.प्रवीण सहगल,डॉ.अमीन,वरिष्ट पत्रकार सत्यप्रकाश सक्सेना,प्रियंका वर्मा जलज,अभिषेक भारद्वाज,मोनिका श्रीवास्तव,अभिषेक श्रीवास्तव,एडवोकेट राम जी शर्मा आदि जलज जी के इस सामाजिक कार्यों में सहयोगी हैं।
आज के हालात पर जलज जी के आँसू आ जाते हैं और अपनी भावनाएं इन पंक्तियों में व्यक्त करते हैं-
“ये मौत का मंजर,
अब देखा नहीं जाता,
हे ईश्वर ! कुछ तो रहम कर,
तू इतना निर्दयी कैसे हो सकता है ?
चाहे मेरे प्राण ले ले,
मेरे लहू का एक -२ कतरा ले ले,
पर इस देश पर,
अब रहम कर,रहम कर,रहम कर…
हे परमपिता ! हे विधाता !
हे मेरे परवरदिगार ! हे मेरे गॉड !”
दिल्ली में जो भी जलज से हो पा रहा हा,वो कर रहे हैं,कोविड के मरीजों से लेकर,ऑक्सीजन की उपलब्धता आदि पर,लोगों को सही जानकारी दे रहे हैं और जो मजदूर या ऐसे लोग,जिनके पास खाने को लाले हैं उनकी भी सहायता कुछ सामाजिक संस्थाओं व गुरुद्वारों से करवा रहे हैं।
जलज जी का कहना है ” मेरे खून का एक -२ बूंद व एक -२ कतरा इंसानियत के लिए ही है,जो देश के लिए न्योछवार है।
जलज जी की इस महान सोंच को नमन। ऐसे लोगों से ही आज ये मानवता ज़िंदा है।

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