लिपुलेख और कालापानी नेपाल का अभिन्न भूभाग है
काठमांडू, बैशाख २० – नेपाल सरकार ने नेपाली भूमि लिपुलेक होते हुए भारत और चीन के बीच संचालित किए जाने वाले कैलाश मानसरोवर यात्रा के संबंध में भारत और चीन दोनों को कूटनीतिक नोट भेजा है । विदेश मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि “नेपाली भूमि लिपुलेक होते हुए आयोजित किए जाने वाले कैलाश मानसरोवर यात्रा के संबंध में नेपाल सरकार ने अपनी स्पष्ट स्थिति और चिंताओं से भारत और चीन दोनों पक्षों को कूटनीतिक माध्यम से पुनः अवगत कराया है ।
विज्ञप्ति में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि नेपाली भूमि लिपुलेक होते हुए भारत और चीन बीच संचालित किए जा रहे कैलाश मानसरोवर यात्रा के संबंध में विभिन्न संचार माध्यमों द्वारा प्रश्न उठाए गए है जिसके बाद विदेश मंत्रालय का ध्यान इस ओर गया है ।
विज्ञप्ति में आगे कहा गया है, “१८१६ की सुगौली संधि के अनुसार महाकाली नदी के पूर्व स्थित लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल के अभिन्न भूभाग हैं—इस तथ्य पर नेपाल सरकार पूरी तरह स्पष्ट और अडिग है।”
इससे पहले भी नेपाल सरकार ने भारत सरकार को उक्त क्षेत्र में सड़क निर्माण या विस्तार, सीमा व्यापार और तीर्थाटन जैसे किसी भी तरह की कोई क्रियाकलाप नहीं करने का निरन्तर आग्रह करती आई है ।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि नेपाल और भारत के बीच घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंधों की भावना के अनुरूप, ऐतिहासिक संधियों, तथ्यों, नक्शों और प्रमाणों के आधार पर सीमा समस्या का समाधान कूटनीतिक माध्यम से करने के लिए नेपाल सरकार सदैव प्रतिबद्ध है।


