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लुम्बिनी प्रदेश में एमाले को बहुमत मिलने की संभावना कम

 
शंकर पोखरेल/फाईल तस्वीर

बुटवल, २ मई । लुम्बनी प्रदेश के मुख्यमन्त्री शंकर पोखरेल ने आज ही मुख्यमन्त्री पद से इस्तिफा दिया था । साथ में आज ही उन्होंने पुनः मुख्यमन्त्री पद का सपथ लेने की तैयारी भी की थी । लेकिन इसकी संभावना कम दिखाई दे रही है ।
प्राप्त सूचन अनुसार विमला वली ने नेकपा एमाले को साथ ना देने के कारण लुम्बिनी प्रदेशसभा में एमाले की एकल बहुमत मिलने की संभावना नहीं है । तत्कालीन नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) की ओर से दाङ–३ (ख) से निर्वाचित वली ने एक प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित करते हुए कहा है कि उनका साथ एमाओवादी को है । जिसके चलते ८१ सदस्यीय प्रदेशसभा में एमाले के साथ सिर्फ ४० सांसद् हैं । सरकार गठन के लिए ४१ सांसदों की समर्थन आवश्यक है । अर्थात् संविधान की धारा १६८ (१) अनुसार एकल बहुमत में सरकार निर्माण के लिए ४१ सांसदों की आवश्यकता है, जो पोखरेल के पक्ष में नहीं है ।
वली स्व. प्रदेशसभा सदस्य उत्तरकुमार वली की धर्मपत्नी हैं । उत्तर कुमार नेकपा एमाले से निर्वाचित हुए थे । उत्तर कुमार का निधन होने के बाद सम्पन्न उप–निर्वाचन में विमल तत्कालीन नेकपा से विजयी हुई थी । लेकिन सर्वोच्च अदालत ने नेकपा को खारीज किया है और मिमला ने माओवादी पार्टी को छनौट किया है । इसकी औपचारिक जानकारी उन्होंने प्रदेशसभा को दे दी है ।
विमला माओवादी प्रवेश करने के कारण अब विपक्षी गठबंधन के पास ४० सांसद् है । ४० सांसदों में से १९ नेपाली कांग्रेस, १७ माओवादी केन्द्र, २ जनता समाजवादी पार्टी और १ साुंसद् राष्ट्रीय जनमोर्चा संबंद्ध हैं । सभामुख भी विपक्षी गठबंधन में होने के कारण ४१ सांसद् विपक्षी गठबंधन में हैं ।

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