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एक ट्वीट नेपाल के मीडिया से लेकर राजनीतिक जानकारो के बीच चर्चा का केंद है…: दीपेंद्र कुमार चौबे

 

ये है सुब्रह्मण्यम स्वामी जिनको भारतीय राजनीति में बहुत ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता है लेकिन इनके ज्ञान का कायल मैं व्यक्तिगत रूप से हूं। कई पार्टियों से होते हुए अभी BJP के कोटे से राज्यसभा सांसद है, इनका ट्वीट उस समय आया है जब नेपाल में सरकार गिराने और बनाने का दौर चल रहा है ऐसा नही है की पूरी तरह से उनके ट्वीट को नकारा जा सके इसमें कुछ तो सच्चाई है ही , इसको समझने के लिए आप को उस समय को याद करना होगा जब दूसरी बार के पी ओली का ताजपोशी वाम पंथ के दूसरे धरे के प्रमुख प्रचंड के समर्थन से हुआ था।
उस समय भारत के सत्ता से लेकर विपक्ष तक का पसंद ओली ही थे और अंखिरकार ओली ही नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे ।
इसको थोड़ा और समझ लेने की जरूरी है पिछले साल जब नेपाल कोरोना से जंग लड़ रहा था उसी समय प्रधान मंत्री ओली सीमा विवाद से लेकर अयोध्या विवाद को नेपाल में जन्म दे रहे थे साथ ही भारतीय मीडिया ओली को चाइना के हनी ट्रैप में फसने की कहानी चला रही थी इन सब के बीच देखने वाली बात यह थी की भारतीय सत्ता पक्ष के किसी भी व्यक्ति ने कोई टीका टिप्पणी ओली पर नहीं किया जब की पूरी विवाद भारत से सबंधित था।
नेपाल में आज सरकार बनाने के लिए राष्टपति के पास अपनी दावा रखने का आखरी दिन है लेकिन कोई भी पार्टी बहुमत के गणित के साथ अभी तक नही पहुंचा हैं।
आप के जानकारी के लिए बता दूं नेपाल में किसी भी एक दल के पास सरकार बनाने का बहुमत नहीं है, जिस तरह से मीटिंग का दौर पिछले कोई दिनों से चल रहे है वह आज बहुमत के दावे करने में अभी तक सफल नहीं होते दिख रहा है ।
अगर बहुमत के दावे आज पेश नही हुआ तो आगे क्या होगा आगे राष्टपति सब से बड़े दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगी और वो दल है ओली का दल यहां सवाल है ओली कैसे फिर अपना बहुमत सिद्ध करेंगे इसको समझना होगा ।
जिस तरह से एमाले के एक कुछ नेता अविश्वास प्रस्ताव के समय अनुपस्थित रहें थे और मधेशबादी दल के एक पक्ष तटस्थ रहा था यह अपने आप में कई राजनीतिक चेतना को बयान कर रहा था और सीधा साधा इसका इशारा और जनाकारो के विचार इस तरफ फिर से इशारा कर रहा है की अगली बार भी ओली ही प्रधानमंत्री बन सकते है।
कहा जाता है कि राजनीति अनिश्चिता का खेल हैं इसको भी भी दरकिनार नहीं किया जा सकता हैं अगर नेपाली कांग्रेस माओवादी केंद और मदेशबादी दल अपने अहंकार से उपर उठ सच में ओली को हटाना चाहते हैं तो इस बार किसी मधेशी नेता के नितृत्व में सरकार बनाने का दावा करे इससे बहुमत का गणित मदेशी नेतृत्व में सरकार और ओली से देश को निजात मिल सकता है।

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दीपेन्द्र चौबे

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