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पूर्व मा‌ओवादी के सात मंत्रियों को पद मुक्त करने का आदेश

 

6 जेठ, काठमांडू।

सुप्रीम कोर्ट ने सात गैर-सांसदों को मंत्रियों के रूप में सेवा करने से रोकने के लिए एक अंतरिम आदेश जारी किया है।

मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर जबरा की एकल पीठ ने गृह मंत्री राम बहादुर थापा बादल, ऊर्जा मंत्री शीर्ष बहादुर रायमाझी, उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्री लेखराज भट्ट, शहरी विकास मंत्री प्रभु साह, श्रम मंत्री गौरी शंकर चौधरी, जल आपूर्ति मंत्री मणि थापा और खेल मंत्री दावा लामा को मंत्री की हैसियत से कोई भी काम नहीं करने का, अंतरिम आदेश जारी किया है।

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पद जाने वाले मंत्रियों में वे लोग  शामिल हैं जो सीपीएन-माओवादी केंद्र छोड़कर सीपीएन-यूएमएल में शामिल हुए थे। यूएमएल और यूसीपीएन (माओवादी) केंद्र को अलग करने के फागुन २३ गते  सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, ये पूर्व यूसीपीएन (माओवादी) सांसद यूसीपीएन (माओवादी) केंद्र में वापस आए बिना यूएमएल में शामिल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व माओवादी नेताओं के मंत्रालय खाली हो गए हैं।

एडवोकेट बिराज थापा और एडवोकेट कपिल देव ढकाल ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर कर कहा था कि जो व्यक्ति संसद का सदस्य नहीं है, उसे मंत्री के रूप में फिर से नियुक्त करना असंवैधानिक होगा।

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संविधान में कहा गया है कि  गैर-संसदीय मंत्री को छह महीने के भीतर संसद का सदस्य बनना होगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो लोग मंत्री बनने के बाद भी संसद के सदस्य नहीं बन सके, उनकी पुनर्नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 1, 2 और 3 के प्रावधानों, संविधान के सार और भावना के खिलाफ है।

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