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No Rest To Dhoni

 

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने भारतीय क्रिकेट प्रशासकों से कभी नहीं ‍कहा कि उन्हें आराम की जरूरत है, लिहाजा अक्टूबर में इंग्लैंड के खिलाफ 5 वनडे मैचों की घरेलू सिरीज में नहीं खेलेंगे। मीडिया में आ रही खबरों के बीच यह सनसनीखेज खुलासा जानेमाने पत्रकार देवाशीष दत्ता ने किया है।

कोलकाता के देवाशीष ऐसे पत्रकार हैं, जिनकी वर्तमान क्रिकेटरों से ही नहीं बल्कि पूर्व क्रिकेटरों से भी गहरी दोस्ती है। गुरुवार को एनडीटीवी के प्राइम टाइम शो में इंग्लैंड के खिलाफ चुनी गई युवा क्रिकेट टीम के बारे में अलग अलग विशेषज्ञों की डेढ़ घंटे तक बहस चली, जिसमें बोर्ड की तरफ से निरंजन शाह, पत्रकार देवाषीश दत्ता, सुरिंदर खन्ना, अतुल वासन और अन्य मेहमानों ने हिस्सा लिया।

इसी बहस में जब अधिक क्रिकेट खेलने बात सामने आई और धोनी ने आराम मांगने की गुहार लगाई, तो यकायक देवाशीष तैश में आ गए और उन्होंने दावे के साथ कहा कि धोनी ने बोर्ड के पदाधिकारियों से यह कभी नहीं कहा कि वे इंग्लैंड के खिलाफ सिरीज में आराम करना चाहते हैं। धोनी ऐसा बोल ही नहीं सकते। यह सब उन लोगों की फितरत है, जो धोनी से बात करना तो दूर आसपास फटक भी नहीं सकते।

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देवाषीश ने चोट और फिटनेस समस्या से जूझ रहे 7 ‍सीनियर खिलाड़ियों के स्थान पर युवा खिलाड़ियों को शामिल करने के फैसला का स्वागत तो किया लेकिन साथ ही कहा कि इस सिरीज में सबसे बड़ी जिम्मेदारी गौतम गंभीर की रही, जिन्हें पूरी सिरीज में अच्छी शुरुआत देनी होगी।

देबू ने यह भी कहा कि हरभजन या नेहरा जैसे खिलाड़ियों को टीम में शामिल नहीं करने से उन्हें बुरा नहीं मानना चाहिए। हरभजन ने इस साल 17 मैचों में केवल 17 विकेट लिए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इंग्लैंड दौरे में ‍टीम इंडिया के खिलाड़ी दिल से खेले थे? पूरे दौरे में जीत का जोश नदारद था। अब जबकि युवाओं को मौका मिला है तो उन्हें इस मौके को भुनाना चाहिए।

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देवाशीष ने इस पर भी आपत्ति ली कि टीम इंडिया के खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट खेलने से क्यों कतराते हैं। धोनी और हरभजन ने 2008 के बाद किसी भी घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया है। ईरानी ट्रौफी, दुलीप ट्रॉफी या फिर रणजी ट्रॉफी में ये स्टार क्यों नहीं खेलते? जो लोग आईपीएल जैसे टूर्नामेंट को घरेलू क्रिकेट मानते हैं, वे भूल करते हैं। बोर्ड को चाहिए कि वह खिलाड़ियों को निर्देश दे कि उन्हें 2 माह तक घरेलू क्रिकेट में खेलना होगा, इससे युवा खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

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उन्होंने याद दिलाया कि कपिल देव ने जब पहली बार घरेलू क्रिकेट में सुनील गावस्कर जैसे महान क्रिकेटर को बोल्ड किया था तो पूरे देश ने जाना था कि कोई इस नाम का गेंदबाज भी आया है, जो गावस्कर को आउट कर सकता है। देश के कई क्रिकेटर हैं, जो घरेलू क्रिकेट के बूते पर ही भारतीय टीम में आए हैं और लंबे समय तक बरकरार रहे हैं। आईपीएल देश की प्रतिभा खोज का मापदंड बिलकुल भी नहीं है। यह सिर्फ बोर्ड के पैसे बनाने का साधन है। (वेबदुनिया न्यूज)

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