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लुम्बिनी प्रदेश सरकार अल्पमत में, तत्काल मुख्यमन्त्री पद से इस्तिफा देने के लिए आग्रह

 
शंकर पोखरेल/फाईल तस्वीर

काठमांडू, ३ जुलाई । लुम्बिनी प्रदेश सरकार के मुख्यमन्त्री शंकर पोखरेल अल्पमत में पड़ गए हैं । जनता सजमावादी पार्टी (जसपा) की ओर से राज्यमन्त्री में नियुक्त सुमन शर्मा रायमाझी ने अपने पद से इस्तिफा देने के कारण सरकार अल्पमत में पड़ गया है ।
कूल ८३ सदस्यीय लुम्बिनी प्रदेशसभा में बहुमत के लिए ४२ सांसदों की समर्थन आवश्यक है । लेकिन रायमाझी सरकार से बाहर होते ही मुख्यमन्त्री पोखरेल के पक्ष में ४१ सांसद रह गए हैं । प्रदेशसभा में सत्ताधारी दल नेकपा एमाले के ३८ सांसद् हैं । जसपा के ४ सांसद् सरकार में सहभागी होने के कारण सरकार के पक्ष में बहुमत था । लेकिन राज्यमन्त्री रायमाझी ने इस्तिफा देने के कारण सरकार अल्पमत में पड़ गए या ।
सरकार अल्पमत में पड़ते ही विपक्षी दलों ने मुख्यमन्त्री पोखरेल को तत्काल पद से इस्तिफा देने के लिए कहा है । नेपाली कांग्रेस के प्रमुख सचेकत फखरुद्दिन खान का कहना है– ‘सरकार में शामील एक मन्त्री ने इस्तिफा दिया है, जिसके चलते मुख्यमन्त्री अल्पमत में पड़ चुके हैं, नैतिकता की दृष्टिकोण से अब उनको एक मिनट भी सत्ता में रहने की अधिकार नहीं है ।’ इसीतरह माओवादी केन्द्र के प्रमुख सचेतक तुलाराम घर्ती ने भी कहा है कि वैशाख १९ गते ही मुख्यमन्त्री पोखरेल अल्पमत में पड़ चुके थे, लेकिन प्रदेश प्रमुख की मिलिभगत में उन्होंने मनमानी कर मन्त्रियों को नियुक्त किया था । उनका मानना है कि अब तो वह भी नहीं रहा, इसीलिए मुख्यमन्त्री पोखरेल को तत्काल पद से इस्तिफा देना चाहिए ।
सरकार अल्पमत में पड़ते ही सरकार द्वारा प्रदेशसभा में पेश बजट पारित होने की सम्भावना कम है । प्रदेशसभा बैठक आषाढ़ २७ गते के लिए तय है । प्रदेशसभा में नेपाली कांग्रेस के १९, माओवादी केन्द्र के सभामुख के साथ १९, जनता समाजवादी पार्टी के ३ और राष्ट्रीय जनमोर्चा के १ सांसद् है, जो विपक्षी गठबंधन में हैं ।

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