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आज है रथयात्रा, जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा में जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ की क्या है विशेषता

 

भगवान जगन्नाथ की पुरी रथ यात्रा 12 जुलाई, दिन सोमवार यानी आज निकाली जा रही है। चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी मंदिर की रथ यात्रा पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। जगन्नाथ मंदिर उड़ीसा के पुरी में स्थित है। यहां पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी का प्रतिरूप विराजमान है, जिसके दर्शन के लिए देश के हर कोने से लोग आते हैं। जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा में जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी अलग-अलग रथ में सवार होकर पुरी की यात्रा करते हैं। तीनों लोगों के रथ के रंग, आकार और सजावट में काफी भिन्नता है। भगवान जगन्नाथ की रथ बाकि भाई और बहनों से बड़ा है। आज हम रथ की विशेषता पर प्रकाश डालेंगे।

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भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम ‘नंदीघोष’ है

भगवान जगन्नाथ के रथ को बनाने में कुल 742 लकड़ी के टुकड़े का प्रयोग किया जाता है। इस रथ की ऊँचाई लगभग 45 फिट 6 इंच होती है। इसके अलावा रथ का फर्श 34 फिट 6 इंच और सिंहासन का क्षेत्र 35 वर्ग फिट का होता है। यह रथ 16 पहिये पर टिका होता है। सभी पहियों का डायामीटर 7 फीट का होता है।

भगवान बलभद्र के रथ का नाम ‘तलध्वज’ है

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भगवान बलभद्र के रथ को बनाने में कुल 731 लकड़ी के टुकड़े का प्रयोग किया जाता है। इस रथ की ऊँचाई लगभग 45 फिट होती है। इसके अलावा रथ का फर्श 33 फिट और सिंहासन वाला क्षेत्र 34 वर्ग फिट का होता है। यह रथ 14 पहियों पर टिका हुआ है। इसके पहिये का व्यास 6.5 रखा जाता है।

सुभद्रा के रथ का नाम ‘देवदलन’ है

सुभद्रा के रथ को बनाने में कुल 711 लकड़ी के टुकड़े का प्रयोग किया जाता है। इस रथ की ऊंचाई लगभग 44 फिट 6 इंच होती है। इसके अलावा रथ का फर्श 31 फिट 6 इंच का और सिंहासन का क्षेत्र 33 वर्ग फीट का होता है।

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