“राखी “एक प्यारा एहसास : मनीषा मारू
“राखी “एक प्यारा एहसास – मनीषा मारू
एक राखी उन शहीदों के नाम, जो परिवार का दुलार छोड़ हुए देश के लिए कुर्बान।
एक रखी उनकें नाम, जो अपने घर आंगन का मोह छोड़ चले गए सरहद पार।
एक राखी उनकें नाम, जो हुए घर से बेघर और कहर ढ़ाया जिनपर कॉरोना काल।
एक राखी उनके नाम,जिनकी कलाई हुई सुनी और निगाहें ढूंढ रही वो गुजरा प्यार फिर से पंथ निहार।
एक राखी उनके नाम, जिनकी हंसती खेलती दुनिया पलक झपकते ही उजड़ी।।
एक राखी डॉक्टर नर्स पुलिस प्रहरी के नाम,
अपनी जान को जी जोखिम में डाल, हर वक्त औरों के लिए रहते तैयार।।
एक राखी मेरे प्यारे भाइयों के नाम,दूर से ही निकलती जिनकी हर एक दर्द में मेरे लिए जान।
एक राखी सभी बच्चों और बड़ों के नाम,जितना भी लड़ झगड़ले अंत में बरसता सिर्फ प्यार ही प्यार।
एक राखी सभी मंचों के नाम, जिनसे बंधकर हमारी लेखनी निखरती और दिखाती हरपल कमाल।

बिराटनगर,नेपाल |

