Wed. Jun 10th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

मिथिला क्षेत्र का महान पर्व चौरचन के दिन की जाती है श्रापित चंद्र की पूजा, जानिये महत्त्व और कथा

 


चौरचन (Chaurchan) पर्व के बारे में पुराणों में ऐसा वर्णन मिलता है कि इसी दिन चंद्रमा को कलंक लगा था। इसलिए इस दिन चाँद को देखने की मनाही है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। इसी दिन चौरचन भी मनाया जाता है। इस साल चौरचन १० सितम्बर शुक्रवार को मनाया जा रहा है । यह त्योहार मिथिला क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन चंद्र देव की उपासना की जाती है। कहते हैं कि जो व्यक्ति गणेश चतुर्थी की शाम भगवान गणेश के साथ चंद्र देव की पूजा करता है। वह चंद्र दोष से मुक्त हो जाता है।चतुर्थी (चौठ) तिथि में शाम के समय चौरचन पूजा होती है। चौरचन पर्व के बारे में पुराणों में ऐसा वर्णन मिलता है कि इसी दिन चंद्रमा को कलंक लगा था। इसलिए इस दिन चाँद को देखने की मनाही है।

यह भी पढें   सुदन गुरुङ तथा महावीर पुन ने ली शपथ

चौरचन का महत्व:

मिथिला में प्रकृति से जुड़े त्योहारों का महत्व हमेशा से बहुत अधिक रहा है। जहां एक ओर सूर्यदेव की उपासना कर मिथिलावासी छठ पर्व मनाते हैं। वहीं, दूसरी ओर चौरचन का त्योहार चंद्र देव की पूजन के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन चंद्र देव की पूजा करने से व्यक्ति झूठे कलंक से बच जाता है।

चौठ चंद्र पूजन विधि:

इस दिन सुबह से शाम व्रत रखकर भक्त पूजन में लीन रहते हैं। शाम के समय घर के आंगन को गाय के गोबर से लीपकर साफ करते हैं। फिर केले के पत्ते की मदद से गोलाकार चांद बनाएं। अब इस पर तरह-तरह के मीठे पकवान जैसे कि खीर, मिठाई, गुजिया और फल रखें। पश्चिम दिशा की ओर मुख करके रोहिणी (नक्षत्र) सहित चतुर्थी में चंद्रमा की पूजा उजले फूल से करें। इसके उपरांत घर में जितने लोग हैं, उतनी ही संख्या में पकवानों से भरी डाली और दही के बर्तन को रखें। अब एक-एक कर डाली, दही का बर्तन, केला, खीरा आदि को हाथों में उठाकर ‘सिंह: प्रसेनमवधिस्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमार मन्दिस्तव ह्येष स्यामन्तक: स्त’ इस मंत्र को पढ़कर चंद्रमा को समर्पित करें।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 8 जून 2026 सोमवार शुभसंवत् 2083

चौरचन की कथा:

एक दिन भगवान गणेश अपने वाहन मूषक के साथ कैलाश पर घूम रहे थे। तभी अचानक चंद्र देव उन्हें देखकर हंसने लगे, गणेश जी को उनके हंसने की वजह समझ नहीं आई। उन्होंने चंद्र देव से पूछा कि आप क्यों हंस रहे हैं। इसका जवाब देते हुए चंद्र देव ने कहा कि वह भगवान गणेश का विचित्र रूप देख कर हंस रहे हैं। साथ ही उन्होंने अपने रूप का बखान भी किया।

गणेश जी को चंद्र देव की मजाक उड़ाने की प्रवृत्ति पर क्रोध आया। उन्होंने चंद्र देव को यह श्राप दिया कि तुम्हें अपने रूप पर बहुत अभिमान है कि तुम बहुत सुंदर दिखते हो लेकिन आज से तुम कुरूप हो जाओ। जो कोई भी व्यक्ति तुम्हें देखेगा उसे झूठा कलंक लगेगा। कोई अपराध न होने के बावजूद भी वह अपराधी कहलाएगा।

यह भी पढें   नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल की भारत यात्रा: द्विपक्षीय संबंधों को नई गति, UPI-NPI कनेक्टिविटी और कानूनी सहयोग पर अहम सहमति

श्राप सुनते ही चंद्र देव का अभिमान चूर चूर हो गया। उन्होंने गणेश जी से क्षमा मांगी और कहा भगवन् मुझे इस श्राप से मुक्त कीजिए। चंद्र देव को पश्चाताप करते देख गणेश जी ने उन्हें क्षमा कर दिया। श्राप पूरी तरह से वापस नहीं लिया जा सकता था इसलिए यह कहा गया कि जो कोई भी व्यक्ति गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र देव को देखेगा। उस पर झूठा आरोप लगेगा। इससे बचने के लिए ही मिथिला में गणेश चतुर्थी की शाम को चंद्रमा की पूजा की जाती है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *