हिंदी साहित्य को नेपाल से एक और भेंट “साहित्य समाज का दर्पण है” नामक पुस्तक का विमोचन
शिवचन्द्र चौधरी, सर्लाही । २०३६ साल के जनांदोलन के वक्त जब राजतंत्र के खिलाफ चूं शब्द भी बोलना खतरे से खेलने के बराबर था प्रजातन्त्र के सेनानी हृदयनारायण चौधरी ने “व्यवस्था को बदल डालो” नामक पुस्तक लिखकर बनारस से प्रकाशन करवाकर सर्लाही से नाटक के मंचन का साहसिक कार्य किया था । बार-बार जेल जानेवाले रामहरि जोशी के साथ सहकार्य करनेवाले ,२०४६ के प्रजातन्त्र बहाली आंदोलन में भी हमलोंगो के साथ-साथ दिन-रात संघर्षरत रहनेवाले श्री चौधरी को नेपाली कांग्रेस के संसदीय टिकट से वंचित कर दिया गया और परिणाम यह हुआ कि २०४६ के आंदोलन की सफलता के बाद होनेवाले प्रथम आम निर्वाचन में सर्लाही के ५ में से ४ सीट पर कांग्रेस विजयी हुई । हृदयनारायण को टिकट नहीं देने से एक सीट खोना पड़ा ।
कालांतर में “आज का अंधा समाज” तथा “मधेसियों के गद्दारों को फांसी दो” जैसी पुस्तकों की रचना की । विभिन्न संघर्ष के कार्यक्रमों में संलग्न रहते हुए विगत एक दशक से मुख्य राजनीतिक गतिविधयों से थोड़े अलग हुए ।
धुन के पक्के समाज की विकृतियों से आहत कोरोनाकाल में कुछ लिखते रहने की तमन्ना के फ़लस्वरूप आज २०७८ असोज ३० गते “साहित्य समाज का दर्पण है” नामक किताब का विमोचन हुआ ।
जिला समन्वय समिति, सर्लाही के सभाकक्ष में समिति के प्रमुख मेथुर चौधरीजी की अध्यक्षता में तथा पूर्व मंत्री मातृका प्रसाद यादवजी के प्रमुख आथित्य में लोकार्पण का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । विशिष्ट अतिथि के रूप में नागरिक समाज,उद्योग वाणिज्य संघ,बार एसोसिएशन ,नेपाल मानवाधिकार संगठन,जनविकास समाज के अध्यक्ष गण क्रमशः उग्रकान्त झा,वीरेंद्र साह, नरेश चौधरी, रजनीकांत झा तथा रामदेव ठाकुर की उपस्थिति रही । अतिथियों में समाजसेवी कौशल सिंह,अजित सिंह,गजेंद्र प्रसाद गुप्ता,बिनती प्रसाद चौधरी,शिक्षाप्रेमी पूर्व कैंपस-चीफ कृष्णदेव यादव,रमेश लाल कर्ण,दयाकांत मिश्र ,कानूनविद मदन राय, रामबदन साह, मोहन यादव,अधिकारकर्मी मुकेश मिश्र , ज्येष्ठ नागरिक जिला उपाध्यक्ष रविन्द्र सिंह लगायत के व्यक्तित्व मौजूद रहे।
नागरिक समाज के महासचिव तथा मानवाधिकार संगठन के उपाध्यक्ष शिवचन्द्र चौधरी ने आगन्तुकों के लिए स्वागत-मन्तव्य दिया और अतीत में प्रजातन्त्र के लिए किए गए संघर्ष का स्मरण कराया ।
“होस्टे-हेंसे” नामक संस्था के उच्च अधिकारी तथा लेखक के ज्येष्ठ पुत्र विनय चौधरी के कुशल आयोजकत्व में सम्पन्न कार्यक्रम का उदघोषण-कार्य शिक्षक जितेंद्र लाल दास के द्वारा निर्वहन किया गया।
सर्लाही के साथियों से पूर्व परिचित प्रमुख अतिथि मातृका यादव सहित अन्य वक्ताओं ने लेखक के संघर्षमय जीवन और जज्बात की सराहना की तथा सभी प्रबुद्ध वर्ग,नागरिक समाज , वकील, पत्रकार ,अधिकारकर्मी एवं विभिन्न दलों के निडर स्वच्छ छवि के नेता कार्यकर्ता को एकसाथ मिलकर भ्रष्टाचार के विरुद्ध सुशासन कायम करने हेतु सयुंक्त संघर्ष करने की सलाह दी । इसकी शुरुआत सर्लाही के क्रांतिकारी भूमि से करने का आह्वाहन किया ।
इस मौके पर समाचार संकलन हेतु ए वी न्यूज के बख्तियार अली,योहो टेलीविवजन के मनोज यादव तथा अन्नपूर्णा पोस्ट के सुनील ठाकुर सहित के पत्रकारों की उपस्थिति रही ।




