15 अगस्त का दिन ही क्यों चुना गया भारत की आजादी के लिए
भारत आज 67वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस मौके पर देशभर में आजादी का जश्न मनाया जा रहा है। यहां यह जानना बेहद दिलचस्प होगा कि आखिर 15 अगस्त को ही भारत की आजादी का दिन क्यों चुना गया। एक दिन पहले यानी 14 अगस्त को पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।
कहा जाता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान शत्रु देशों की सेनाओं ने इसी दिन सरेंडर किया था। ऐसे में लॉर्ड माउंटबेटन ने निश्चय किया कि 15 अगस्त को भारत का स्वतंत्रता दिवस होगा।
इन 15 भारतीय वीरांगनाओं के बिना अधूरी है स्वाधीनता की दास्तां
इस दिन के बारे में एक और तथ्य है कि भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद 14 अगस्त को कराची में झंडा में फहराया गया। इसके बाद माउंटबेटन को यहां आने में एक दिन लगा और 15 अगस्त को भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया गया।
स्वाधीनता संग्राम जितना महान् था, उतना ही प्रेरक। उस अथक संघर्ष में कई विराट चरित्र संसार के सामने आए। उनके योगदान और बलिदान बेमिसाल हैं। समूचा राष्ट्र सदैव कृतज्ञ है। इस बार भास्कर ने जुटाए हैं, उस दौर के ऐसे ही कुछ पल, कुछ पहल, कुछ घटनाएं, कुछ फैसले और कुछ किरदार।
योद्धा क्रांतिकारियों, समर्पित सेनानियों और संघर्षशील नेताओं के बेजोड़ व्यक्तित्व और कृतित्व से जुड़े अनछुए पहलू। ऐसे प्रेरक प्रसंग, जिन्हें पाठक जीवन में सीधे-सीधे अपना भी सकें।
भारते के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए नियंत्रण रेखा पर पांच सैनिकों के मारे जाने को कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया है, हालांकि उन्होंने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया.
उन्होंने कहा कि भारत-पाक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए ज़रूरी है कि पाकिस्तान अपनी ज़मीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न होने दे.मनमोहन सिंह ने कहा, “नियंत्रण रेखा पर हाल ही में हमारे जवानो पर कायरतापूर्ण हमला किया गया. इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे.”
विपक्ष भारतीय सैनिकों पर हमले के लिए पाकिस्तानी सेना को दोषी ठहराता रहा है लेकिन पाकिस्तान ने ऐसी किसी भी आरोपों से इंकार किया है.
करीब आधे घंटे के भाषण में प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान से कहा कि वो अपनी ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ़ न होने दे.
उन्होंने कहा, “हमारी ये भी कोशिश रही है कि पड़ोसी देशों के साथ दोस्ती बढ़े लेकिन पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर होने के लिए ये ज़रूरी है कि वो अपनी सरज़मीं और अपने नियंत्रण वाली ज़मीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ़ किसी भी कार्रवाई के लिए न होने दे.”

