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दीपावली पूजन महत्व:- आचार्य राधाकान्त शास्त्री

 

*दीपावली पूजन महत्व:- आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
*कुम्भ – मीन लग्न:- प्रथम स्थिर द्विस्वभाव लग्न- दिन में 1:30 से 3 बजे तक और 3 बजे से 4:37 तक।*

*वृष – मिथुन लग्न:- द्वितीय स्थिर लग्न सायं 6:14 से प्रारंभ हो रहा है, जो रात्रि 8:34 तक और पुनः 10:30 तक।*

*सिंह लग्न :- तृतीय स्थिर लग्न रात्रि 12:45 से 3:00 बजे तक है*
*ये तीनों लग्न क्रमशः- 1:30 से 3 बजे तक बाहरी व्यवसाय, व्यवसायिक प्रतिष्ठान, बड़े दुकान एवं बड़े विक्रय केंद्र, बड़े एजेंसी,ऑफिस के लिए उत्तम है।*

*जबकि द्विस्वभाव लग्न 3 बजे से 4:30 तक सामान्य चल व्यवसाय, चल दुकान, उपकरण दुकान के लिए उत्तम होगा।*

*वहीं गोधूलि प्रदोष काल में भी सायं 5 से 6 बजे तक गृह पूजन श्रेष्ठ होगा।*

*जबकि गोधूलि पश्चात रात्रि 6:14 से 8:10 तक भी घर के स्थिर पूजन के लिए श्रेष्ठ रहेगा।*

*जबकि द्विस्वभाव लग्न 8:10 से 10:30 तक सामाजिक व्यावसायिक कार्य , विद्यार्थी कार्य, छोटे एजेंसी कार्य, प्रतिष्ठान कार्य, निजी ऑफिस कार्य, फीस एवं कर – ब्याज ऋण वसूली कार्य के लिए सर्वोत्तम रहेगा।*

*वही सिंह लग्न में रात्रि 12:45 से 3 बजे तक स्थिर तिजोरी, गल्ला, सोने चांदी के आभूषण आदि के स्थिर करण के लिए सर्वोत्तम होगा।*

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*माता महालक्ष्मी के पूजन में गणेश अथर्वशीर्ष, कनकधारा,श्री सूक्त का पाठ करते हुवे आंवला, अमरूद, अनार, जायफल, जावित्री, कमलगट्टा, अदरक और केला जरूर अर्पण करें,*
*माता महालक्ष्मी सबको उत्तम सुख सौभाग्य, आयु आरोग्यता सम्पन्नता एवं सम्पूर्ण प्रसन्नता प्रदान करें। सबके दीपावली पूजन के साफल्यता लिए हमारी हार्दिक शुभकामना…*

*दीपावली के दिन रात में पूजन के बाद अगली सुबह सूर्योदय से पहले दरिद्र निस्तारण जरूर करना चाहिए। यह काम आज भोर में किया जाएगा। दरिद्र निस्तारण से घर परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है। दरिद्रता नहीं आती।*
सूप बजा कर घरों से खदेड़ी जाएगी दरिद्रता।
दीपावली में धन की देवी लक्ष्मी के आगमन के बाद आज हीं पौ फटने से पहले ही बांस की सूप बजा कर घरों से दरिद्र को बाहर खदेड़ दिया जाएगा। सुबह चार बजे महिलाएं घर को दरिद्रता से दूर रखने के लिए बांस की सूप को घर के कोने-कोने में बजाकर सदियों से चल आ रही इस परंपरा के अनुसार सूंप बजाकर दरिद्र भगाने का संबंध सुख समृद्धि से जोड़ा गया है।
*सूप बजा कर घरों से भगाई जाती है दरिद्रता, दीपावली में धन की देवी लक्ष्मी के आगमन के बाद शुक्रवार को पौ फटने से पहले ही बांस की सूप बजा कर घरों से दरिद्र को बाहर खदेड़ गया। सुबह चार बजे महिलाएं घर को दरिद्रता से मुक्त करेंगी। शास्त्रों में वर्णित श्लोक -शेष रात्रौ दरिद्रा निहिषार्णम, हमारी विशिष्ट परंपरा का बोध कराता है।* *दीपावली के दिन जब घर में लक्ष्मी आ जाएं तो दरिद्र को घर से बाहर भगा दिया जाए। इसके बाद ही स्थाई रुप से लक्ष्मी का घर में वास हो पाता है। बहुत उदाहरण ऐसे में मिले है कि जिससे यह परंपरा लोगों के मन में विराट रुप से स्थापित है। भारत ऋषि और कृषि प्रधान देश है। दोनों के सामंजस्य के बिना सुख की कामना नहीं पूर्ण होती। बांस के बने सूंप को बजाकर दरिद्र भगाने के पीछे कई तर्क है। शास्त्र सूंप को वनस्पति मानता है। मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक बांस का तारतम्य बना हुआ है। सूंप का अर्थ समृद्धि को ग्रहण कर अशुद्धि और दरिद्रता को छांटना है। इसी मान्यता के तहत महिलाएं इस परंपरा का पालन करती है। उन्होंने बताया कि ऋग्वेद में इस परंपरा का उल्लेख मिलता है। कथा के क्रम में यह बात लिखी गई है कि लक्ष्मी और दरिद्र दोनों सगी बहनें थी। लेकिन दोनों का एक साथ निवास नहीं होता। परंपरा विरोधी तत्वों को धारण करने वाली दोनों बहनों के विषय में कहा गया है कि माता लक्ष्मी के विशेष पूजन के बाद भोर में उनकी दूसरी बहन दरिद्रता घर मे प्रवेश करने का कोशिश करती है।अतः इनका प्रवेश घर पर नहीं हो इसलिए भोर में दरिद्रा ज्येष्ठा को आने रोका एवं भगाया जाता है। यह दरिद्रा शाम होते ही पीपल, पाकड़, केले के पेड़, गूलर, कांटेदार व दूधयुक्त वृक्ष का आश्रय लेती है। इसलिए इन वनस्पतियों को घर के सामने नहीं लगाने का निर्देश शास्त्र देता है। कांटेदार वृक्षों में बेल का पेड़ घर के पीछे तथा शमी का वृक्ष सामने दाहिने ओर होना चाहिए। शास्त्र ने इसे समृद्धि का द्योतक माना है। मदार और तुलसी का पौधा शुभ है। यह घर के सामने या फिर आंगन में लगाया जा सकता है। घर में इन वनस्पतियों के रहने से लक्ष्मी प्रसन्न होती है।*

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ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
9934428775

*✍🏻 ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
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