छठ के पवित्र त्योहार का आज पहला दिन नहाय-खाय : आचार्य राधाकान्त शास्त्री
आज से सभी व्रती सत्य अहिंसा, एवं पवित्रता को धारण कर स्नान पूजन के बाद अगहनी या बासमती चावल , रोटी, अरहर दाल और कद्दू, की शब्जी या गोभी, आलू, परवल, आदि की शब्जी सेंधा नमक एवं घी में बना कर माता जी को अर्पण कर , गोग्रास निकाल कर , प्रसाद स्वरूप स्वयं भोजन करें , एवं सूर्यनारायण तथा माता जी को स्मरण करें,
फिर रात्रि में भी स्नान पूजन कर उपरोक्त प्रकार से भोजन करें,
और कल के दिन खरना, और तीसरे , चौथे दिन क्रमश: अस्त एवं उदय होते सूर्य को नदी तालाब या घर पर अर्घ्य कुंड बना कर उसमें खड़े होकर अर्घ्य दिया जाएगा।
छठ पर्व की शुरुआत आज से हो रही है। यह पर्व चार दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे और चौथे दिन क्रमश: अस्त होते और उदय होते सूर्य को नदी या तालाब में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं।
*नहाय खाय आज:-*
सुबह स्नान कर नई पवित्र वस्त्र पहनें और अपने अनुसार पूजन कर पवित्र भोजन निर्माण करें। जिसमे खास कर अगहनी चावल, अरहर दाल, कद्दू की शब्जी की प्रधानता होती है।
छठ के प्रसाद और पकवान के लिए मिट्टी लेपकर चूल्हा बनाएं या गैस चूल्हे को साफ कर बनाएं।
कठिन व्रत की शुरुआत में आज आखिरी बार नमक खाना है।
आज चावल (भात) अरहर दाल, और सेंधा नमक से कद्दू यानी लौकी की सब्जी बनेगी।
घर के सभी लोग यही भोजन करेंगे।
और आज के दिन से ही छठ पूजा का सामान जैसे टोकरी, लोटा, फल, मिठाई, नरियल, अर्घ्य के लिए विभिन्न समग्री इकठ्ठा करना आरम्भ हो जाएगा।
आज के नहाय खाय से श्री सूर्यनारायण एवं माता षष्ठी देवी की कृपा सभी भक्तों पर बनी रहे।
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*हरि ॐ गुरुदेव..!*

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