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नेपाल और भारत सीमा पर लगेगा चिकित्सा शिविर, भारतीय डॉक्टर की रहेगी मौजूदगी

 

भारत और नेपाल बार्डर से लगे बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती 300 गांवों में चिकित्सक एक रात बिताएंगे। वे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर इलाज करेंगे। निशुल्क दवा भी उपलब्ध कराएंगे। जरूरत पडऩे पर अस्पताल भेजा जाएगा। यह पहल नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन के बैनर तले होगी। नेपाल सीमा से सटे बहुत से गांवों में आज भी चिकित्सा की सुविधा अच्छी नहीं है। बेतिया जिले में ही सीमावर्ती वाल्मीकिनगर के लोगों को 20 से 25 किलोमीटर दूर इलाज के लिए पीएचसी जाना पड़ता है। मेडिकल कालेज आने के लिए तकरीबन 60 किलोमीटर की दूरी तक करनी पड़ती है। ऐसे में यह शिविर वहां के ग्रामीणों के काफी महत्वपूर्ण होगा। बेतिया के अलावा मधुबनी, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, सुपौल, किशनगंज, अररिया जिले से लगती नेपाल सीमा के गांवों में चिकित्सा शिविर लगाया जाएगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के महराजगंज, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, लखीमपुर खीरी, सिद्धार्थ नगर और पीलीभीत में भी शिविर लगेगा ।

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पिछले माह हुई बैठक में लिया गया था निर्णय
शिविर के आयोजन का निर्णयपिछले माह नेशनल मेडिकोज आर्गेनाइजेशन की बैठक में लिया गया था। इसकी अध्यक्षता आर्गेनाइजेशन के बिहार राज्य के अध्यक्ष डा. पवन अग्रवाल ने की थी। उन्होंने बताया कि बैठक में इस बात पर सहमति बनी थी कि चिकित्सक संबंधित गांव में एक दिन पहले शनिवार को पहुंचेंगे। रात में विश्राम के बाद रविवार को आयोजित चिकित्सा शिविर में मरीजों का इलाज कर वापस आ जाएंगे। शिविर दिसंबर में होगा। इसकी तिथि बाद में निर्धारित की जाएगी।
शिविर में हर रोग के चिकित्सक रहेंगे ।मरीजों के आवश्यक
जांच के साथ आवश्यक दवाएं निशुल्क दी जाएंगी। जरूरत के अनुसार मरीजों को आगे के इलाज के लिए मेडिकल कालेज या अन्य जगह भेजा जाएगा। नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन के जिला अध्यक्ष व राजकीय मेडिकल कालेज व अस्पताल, बेतिया के अधीक्षक डा. प्रमोद कुमार तिवारी ने बताया कि शिविर लगाने के लिए गांवों को चिह्नित किया जा रहा है। जल्द ही यह काम पूरा कर लिया जाएगा। शिविर में पटना एम्स के अलावा सूबे के मेडिकल कालेजों और आर्गेनाइजेशन से जुड़े उत्तर प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों के चिकित्सक व विद्यार्थी भी भाग लेंगे।

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