चर्चा में विमलेंद्र निधि, निधि झुके या देउवा ?

जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर । सोमवार तक धनुषा जिला निवासी पूर्व उप प्रधानमंत्री तथा नेपाली कांग्रेस के उप सभापति बिमलेन्द्र निधि के प्रति नेपाली कांग्रेस सहित अन्य बिपक्षी दलो के नेता तथा कार्यकर्ता या मानें तो पूरे जनकपुर बासी से निधि सहानुभूति बटोरने में कामयाब हासिल किए थे। वहीं देउवा को समर्थन देने के बाद उनके प्रति बिरोध के स्वर उभरने लगी हैं। जितने लोग उतनी बात। नेपाली कांग्रेस के नेता भी मौन है। लोगो के प्रश्नों बौझार हो रहा है ।
एक सर्वे के मुताबिक जनकपुरबासियों की बहुमत में निधि को देउवा को समर्थन नहीं देना चाहिए के पक्ष में दिखा। उनको मानना था कि इस निर्णय से वे हीरो बन उभरते है। उनको क्या महत्वाकांक्षी रह गया है। वे उप प्रधानमंत्री बन चुके है। देश में भेदभाव के चलते वे प्रधानमंत्री भी नहीं बन सकते है। उम्र के 67वसंत पार कर चुके निधि को अगले पांच बर्ष सभापति के इंतजार करना पड़ेगा? तव वे राजनीति रुप से कितना सक्रिय तथा उर्जावान रहेंगे।
दुसरी ओर कुछ राजनीति बिशेषज्ञों की राय है की उनके साथ भी मजबूरी है। वे पार्टी छोड़ नहीं सकते है। वे कांग्रेस के विभाजन समय भी देउवा के लिए हनुमान बनकर तटस्थ थे। प्रदेश दो में कुल 826वोट में निधि 239वोट ला सके। इसमें मधेश के अन्य जिलों से भी कुछ वोट मिला होगा। इस तरह देखा जाए तो प्रदेश दो के आधे वोटर भी निधि को अपना मत नही दियें हैं। ऐसी स्थिति में निधि का मनोबल टूटना तो स्वाभाविक हैं। लेकिन जनकपुरधाम सहित मधेश की जनता को राजनीति गुणा भाग से कोई मतलब नहीं हैं। वे सिर्फ देउवा का बिरोध देखना चाहते हैं। फिर भी निधि के साहस स्वागत योग्य है। नेपाली कांग्रेस के मधेशी युवा पुस्ता को एक रास्ता निर्माण कर दिया है। निधि देउवा की टक्कर देना ही बड़ी बात है। अगर निधि देउवा के साथ रहते तो देउवा पहली बार मे ही जीत हासिल कर लेते । दुर्भाग्य तो यह हुआ कि पहाड़ी मतदाता ने निधि को मत नही दिया। आखिर इनके पास देउवा को भी झुकना पड़ा और निधि के पास भी विकल्प नही था।

