२०४७ का संविधान पुर्नस्थापन का अभियान शुरु
नेपालगन्ज,(बाँके) पवन जायसवाल, असोज ७ गते ।
नेपालगन्ज में एक कार्यक्रम का आयोजन करके राजावादियों ने राजा सहित का प्रजातन्त्र का वकालत किया है और किसी भी हालत में संविधानसभा न होने देने की चेतावनी एक पत्रकार सम्मेलन में दिया है ।
असोज ४ गते शुक्रवार को किया गया पत्रकार सम्मेलन में २०४७ साल का संविधान को ही पुनस्र्थापना अभियान सञ्चालन किया गया है उस समूह ने संविधानसभा असफल हो चुका है इस लियें वह प्रक्रिया को दुबारा न दोहराने देनें की माँग किया है ।
२०४७ साल का संविधान पुनस्र्थापन अभियान के संयोजक किशोरी महतो ने संविधानसभा का निर्वाचन बहिष्कार, हिन्दु राष्ट्र कायम हो राजतन्त्र का पुनस्र्थापन कराने का हमरा आन्दोलन का लक्ष्य रहा है यह बताया ।
नेपालगन्ज में शुक्रवार को पत्रकारों से भेटघाट करके अभियान के संयोजक महतो ने संविधानसभा का निर्वाचन नही होने देनें की चेतावनी दिया है । इस के लियें नेकपा–माओवादी सहित का मोर्चा से सहकार्य करने के लियें तैयार रहे है महतो का कहना है । संविधानसभा का निर्वाचन रोकने के लियें जैसी भी अवस्था का सामना करने के लियें तयार हैं’, महतो ने पत्रकारों से कहा ।
अभियान के महासचिव चक्रदेव जोशी, बाँके जिला के संयोजक भुवनकृष्ण श्रेष्ठ लगायत लोगों ने २०४७ साल का संविधान ही उत्कृष्ट संविधान होने के नाते से उस को जगाने के लियें १० लाख जनता को आन्दोलन में उतारने का दाबी किया है । यह कार्यक्रम धनुषा जिला के जनकपुर से ही शुरुवात करके नेपालगन्ज में पहुँचे है । कार्यक्रम में बाँके, दैलेख, बर्दिया, सुर्खेत लागायत जिला से कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही थी ।
दुसरे संविधानसभा निर्वाचन के लियें देश मे प्रतिकार किया जायगा। प्रतिकार में जनता उतारने के लियें देशव्यापी अभियान चलाया गया बाँके के संयोजक श्रेष्ठ ने जानकारी दिया ।

