नेपालगन्ज में गुल्जार–ए– अदब द्वारा मासिक गजल गोष्ठी
नेपालगन्ज/(बाँके) पवन जायसवाल ।बाँके जिला के नेपालगन्ज में गुल्जार–ए– अदबद्वारा आयोजित मासिक गजल गोष्ठी माघ २९ गते शनिवार को सम्पन्न हुआ है । गुल्जार–ए– अदब ने मासिक गजल गोष्ठी हरेक महीने के अन्तिम शनिवार आयोजित करते या है । नेपालगन्ज उप–महानगरपालिका वार्ड नं.–८ स्थित महेन्द्र पुस्तकालय के सभागृह में माघ २९ गते शनिवार उर्दू साहित्यकारों ने गजल वाचन किये थे ।वह मासिक गजल गोष्ठी उर्दू साहित्यकार सैय्यद असफाक रसूल हाशमी के अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ था मासिक गजल गोष्ठी उर्दू साहित्यकार तथा ईमाम अहमद बिन हम्बल विकास केन्द्र के मौलाना अन्सर नेपाली ने मासिक गजल कार्यक्रम का सञ्चालन किया था ।
सो गजल गोष्ठी कार्यक्रम में गुल्जार–ए–अदब बाँके के अध्यक्ष हाजी अब्दुल लतीफ शौक, अवधी साँस्कृतिक बिकास परिष्द के अध्यक्ष सच्चिदानन्नद चौवे, सैय्यद असफाक रसूल हाशमी, गुल्जार–ए–अदब के सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशी, मौलाना अन्सर नेपाली, मेराज अहमद (हिमाल), अव्दुल हमीद सिद्दीकी (भोला), इस्माइल अन्सारी, आदिल सर्वर नेपाली, मोहम्मद यूसुफ आरफी, समीर अली शेष लगायत लोगों ने “मेहबूब की मेंहदी ही दुल्हन को सजाती है, दिलदार के आँगन को घर अपना बनाती है” मिश्ररा पर साहित्यकारों ने अपनी–अपनी गजल वाचन किये थे मौलाना अन्सर नेपाली ने जानकारी दी ।
इसी तरह वह कार्यक्रम में अवधी साँस्कृतिक बिकास परिष्द के
एक जीभ प्रभुका ही सदा गुणगान गाती है ।
एक जीभ जो आपस में झगडा कराती है ।।
इस सृष्टिको जिसने रचा उस ब्रम्हा प्रभुको भी,
ठगनी माया उनको अंगुली पर नचाती है ।
बच्चों के ऊपर दुःख का साया कभी पड जाये न,
इस लिये माँ सदा आँचल में छिपाती है ।
एक दूषित व्यक्ति गर होता समाज में,
एक मछली ही तालाब को गंदा बनाती है ।
हजारों कौमें मिट गई है पृथ्वी के गर्त में,
वो कौम जो जिन्दा है तारीख बनाती है ।
आनन्द के एक बूंद से सृष्टि सृजन होती,
पानी की एक बूंद ही जीवन बचाती है ।
वह कार्यक्रम में मेराज अहमद (हिमाल) ने प्रस्तुत किया गजल ः–
जुल्मत के अंधेरों से आवाज ये आती है
वो कौम जो जिन्दा है तारिख बनाती है
मेहबूब की मेहंदी ही दुल्हन को सजाती है
दिलदार के आगन को घर अपना बनाती है
बुलबुल भी यही कहती मौसम ये सुहाना है
कोयल को जरा देखो क्या राग सुनाती है
गुल्शन से न पुछो तुम खुश्बू तो है फुलो की
भंवरो को यही खुश्बू दिवाना बनाती है
अफसाने हकीकत मे बदले तो भला कैसे
जब निन्द मे होता हूं वो ख्वाब आती है ।



