केवल एक दिन ही क्यों ? हर दिन का हक मिले.. : मनीषा मारू
नजरों से उतर,हृदय से महसूस कर ,रूह को छू ले अगर मेरे लिखे अल्फाज़ तो समझूंगी हो गया काबुल सबके नाम मेरा ये खुशनुमा पैगाम,
केवल एक दिन ही क्यों?
आज 8 मार्च,
नारी दिवस मनाने की फिर से सुलग रही चिंगारी।
अपने विचारों से,
सबने खूब दी बधाई और भर–भर संदेशों की मारी पिचकारी।
भ्रूण हत्या ,दहेज प्रथा
ऐसे ही कई आंदोलन और अभियानो का फिर हुआ खुबसूरत सा जिक्र और प्रचार।
आत्मरक्षा,आत्मसम्मान,आत्मबल जैसे कई जागरूक शब्दों ने भी कर ही दिया रूढ़िवादिता से जकड़ी जंजीरों पे आज फिर प्रहार।
फिर क्यों ना कोई? आज तक सुन पाया, समझ पाया!
दोहरी जिंदगी में पिसती, हर नारी की खामोश सिसकियों का वो रुद्र चीत्कार।
हर कदम बंदिशों का,
बिछता बेबस कालीन और सज ही जाता संस्कारों का आलीशान दरबार।
नारी तुम जन्मदात्री हो!
फिर थाम क्यों ना लेती? अपनी ही जिंदगी की डोर ,कमान और पीड़ित म्यान में रखी वो बेदर्दी की तलवार।
हैं नारी! मत भूलो तुम शक्ति स्वरूपा हो,
फिर क्यों छुपाती हो? हरपल मुस्काते लबों के संदूक के पीछे दर्द भरी पीड़ा की हर दास्तान।
विरासत में कुछ भी नहीं मिलता यहां किसी को,
कटते पंखों में भरो नई उड़ान और सांसों के संग हौसलों से बनाओ अब लडख़ड़ाई बेसाखियों को छोड़ अपनी नई पहचान।
ना मांगो, ना गुजारिश करो,
अपने हक की लड़ाई तुम खुद लड़ो,
गिरके उठो और बार–बार संभलो और अपने देखें स्वप्ननो का जीवंत महल अब स्वयं ही तैयार करो।
रक्त से सींच ,रक्त बहाकर देती हो नया जन्म,
फिर किस बात से डरती हो तुम? और किस बात का करता पुरुष अहम!
कभी पति के प्राणों को बचाने मौत से लड़ गई ,
तो कभी सुख–संसाधनों को छोड़ पति के संग महल से वन को गई।
वियोग का हलाहाल पीकर,
मीरा–राधा, प्रीत–प्रेम के रंग को सारे जग में अमर कर गई।
कभी बांध पीठ परबच्चों को रणभूमि में भी उतर गई,
तो कभी देश प्रेम और बुरी नजर पे जोहर का खेल भी खेल गई।
अंततः अपने विचारों के आभूषणों को देकर विराम
देना चाहती हूं बस एक यही संदेश..
केवल एक दिन ही क्यों ? हर दिन का हक मिले कुछ खास और विशेष।
नजरों से उतर,हृदय से महसूस कर ,रूह को छू जाएं अगर मेरे लिखे अल्फाज़ तो समझूंगी हो गया कबुल सबके नाम मेरा ये खुशनुमा पैगाम
अगर आप पढ़ने वाले एक पुरुष हो, तो हर नारी को दीजिएगा सम्मान और यदि आप एक नारी हो तो कीजिएगा उसमें से एक होने का सदैव दिल से अभिमान।🙏🙏
मनीषा मारू
नेपाल


