खायल निगम, घायल नागरिक : बिम्मी कालिन्दी शर्मा
मदारी तो सरकार है जो डमरु बजा कर अपने जमूरे खायल निगम को ताली पीट–पीट कर नचा रहा है और घायल नागरिक अपनी छाती पीट रहे हैं

बिम्मी कालिंदी शर्मा , बीरगंज,फरवरी अंक, हिमालिनी ।इस नेपाल नाम के अद्भुत देश मे एक आयल निगम नाम का संस्थान है जो ज्यादा कमीशन डकारने के कारण आयल से खायल निगम हो गया है । वैसे नेपाल वासी और नेपाली भाषी सभी लिक्विड वस्तुओं को भी खाते हैं पीते नहीं । चाहे वह चाय कॉफी हो जूस हो या तेल के रूप में पेट्रोल डिजेल ही क्यों न हो सब खा जाते है । इसीलिए यह खायल निगम भी भ्रष्टाचार के चूल्हे पर कमीशन की कड़ाही तेल गरम कर के खुद ही खा जाता है और देश के नागरिकों को घायल कर देता है । जितनी ज्यादा यह तेल कमीशन के रूप में खाते हैं उतनी ही ज्यादा महंगाई बढ़ती है और देश के नागरिक उसी में घायल हुए जा रहे हैं ।
वैसे कहा जाता है कि सब से ज्यादा भ्रष्टाचार कस्टम, टैक्स, लैंड रेभेन्यू विभाग और अदालत में होता है । पर खायल निगम में बोनस कू रुप में जो कमीशन यंहा के कर्मचारी खा कर निगल जाते हैं उसकी तरफ किसी का ध्यान नही है । वह तो बेचारे सिर्फ बोनस खा रहे हैं खायल निगम प्रभु का शुद्ध प्रसाद के रूप में । यह ऐसा प्रसाद है जो कपड़े में लगे तेल की चिकनाहट हटाने के लिए दिया जाने वाला साबुन में भी कमीशन खाते हैं और उस साबुन के झाग पर ही खायल निगम गुम हो जाता है । खायल निगम तेल के भाव ऐसे बढ़ा रहा है जैसे कोई बच्चा जल्दी–जल्दी सीढ़ी चढ़ रहा है और खुशी किलकारी मार रहा हो । खायल निगम हर हप्ते, महीने या दिन पेट्रोल, डिजेल, गैस और मट्टितेल में भाव बढ़ा कर खुश हो रहा है और नागरिक बेचारे हायल–कायल हो रहे हैं कि कैसे इस महंगाई मे सामंजस्य बैठा सके ।
खायल निगम को खुद के खाने की ही चिंता है देश के नागरिक भूखे रहें, उनके स्कूटी, बाईक, मोटरसाइकिल, कार, बस या ट्रक बिना तेल के भूखे रहें, न चले दम तोड़ दे उसकी बला से । खायल निगम को बस बोनस चाहिए इसके लिए अन्तर्राष्ट्रीय बजार में कच्चे तेल का मूल्य बढ़े न बढ़े अपने मन से बढ़ा देते है । अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का मूल्य घट्ने पर भी यह नहीं घटाएँगें पर बढ़ाएँगें जरूर । तेल का मूल्य जितना ज्यादा बढ़ेगा खायल निगम के कर्मचारी उतना ही ज्यादा चैन से सोएँगें । भले ही देश के तमाम नागरिकों की आंखो से नींद दूर हो जाए । बोनस का इतना बड़ा जाल शायद और कहीं नहीं हैं । सुरसा के मुंह की तरह खायल निगम का मुँह जितना भी खोलो खुलेगा और जितना कमीशन डालो अट भी जाएगा । तेल तो है ही उड़ेलने और डालने के लिए वह चाहे गाड़ी पर डालो या देश के नागरिकों पर छिड़क दो । ऐसे ही पेट्रोल डीजल के भाव बढ़ते रहे तो वह दिन भी दूर नही जब इस से गाडि़यों का सेचन किया जाएगा । जैसे कि गंगाजी जा कर लोग नहाने के बदले अपने शरीर पर गंगाजल का छिड़काव कर के सेचन करते हैं ठीक वैसे ही ।
यदि पेट्रोल डीजल से सब्जी बन सकती तो माशाल्लाह ! खायल निगम के कर्मचारी प्याज के पकौड़े भी इसी में तल कर खाते और शादी–ब्याह में जाने से पहले परफ्यूम के रूप में छिड़कते, पर क्या करें यह सुगंध की जगह बदबू देता है नहीं तो खायल निगम के कर्मचारी तेल का प्रयोग करने से बाज नहीं आते । सच्ची माने में खायल निगम के इन भ्रष्ट और कमीशनखोर कर्मचारियों को पेट्रोल डिजल छिड़क कर जला भी दिया जाए तो भी पाप नहीं लगेगा । तेल का मूल्य बढ़ाने की एक हद होती.है और वह हद खायल निगम लाँघ चुका है ।
तेल से याद आया खाने वाला तेल भी मैत्रीभाव में खायल निगम के पेट्रोल डीजल से सुरताल मिला कर चल रहे हैं । पेट्रोल डीजल के बिना भी गुजारा हो सकता है पर बिना सब्जी या खाने वाले तेल के किसी का गुजारा नहीं हो सकता । तेल का भाव बढ़े तो कोई विरोध नहीं पर दूध का भाव थोड़ा भी बढ़ जाए तो चारों तरफ हायतौबा मचने लगती है । महंगाई ने सब से ज्यादा आक्रमण पेट और रसोई पर किया है । इंसान सब से ज्यादा मजबूर पेट के कारण ही है और मंहगाई इंसान के इस मजबूरी का जम कर फायदा उठा रही है । जितने भी खाद्यान्न है सबकी ढुवानी होती है ट्रक या गाड़ी से और यह सब चलते है पेट्रोल और डीजल से । इंसान का एघार नंबर की प्राकृतिक गाड़ी चलती है खाने के ईंधनÞ से और सारे सवारी साधन चलते पेट्रोल डीजल से । मंहगाई का इन दोनों से चोली दामन का साथ है । जंहा आवश्यक सामानों के भाव बढ़े खायल निगम अपने दत्तक संतान पेट्रोल डीजल का भी भाव बढ़ा देता है और फिर पेट्रोल डीजल के भाव बढ़ते अति आवश्यक चीजों के भाव आसमान छूने लगते हैं । मंहगाई तो अनाथ है इस मन माफिक खिला–पिला कर पाल रहे हैं व्यापारी और खायल निगम । यह अपने स्वार्थ के लिए महंगाई के अस्त्र का प्रयोग कर रहे है और बुरी तरह से घायल हो रहे हैं देश के नागरिक ।
पहले जब पेट्रोल डीजल का भाव बढ़ता था तो देश के विभिन्न विद्यार्थी संगठन और राजनीतिक दलों के भातृ संगठन विरोध करते थे । पर शायद इन्हें भी बोनस में पेट्रोल डीजल सूंघा कर बेहोश कर दिया गया है । इसी लिए भाव उपर भाग रहा है पर यह नीचे ही देख रहे हैं । देश में बेईमानी इसी लिए न फलफूल रही है कि नेता सब निष्क्रिय और कामचोर हो गए हैं ।
सभी ने किसी न किसी पार्टी का झंडा ओढ़ लिया है । अपने आकाओं की चापलूसी कर के और उन के हर गलत कार्य में सिर हिला कर साथ देने से आर्थिक रूप से इनका भविष्य बन गया है पर देश का भविष्य उजड़ रहा है । वैसे इस देश में स्वतंत्र नागरिक हैं ही कितने जो उनके विलाप पर कोई ध्यान देगा ? जनता तो विभिन्न राजनीतिक पार्टी के जन्तु है । योग्य और ईमानदार नागरिक बस गिनती के ही है इसी लिए यही मंहगाई से आक्रान्त होते हैं और घायल भी हो जाते है । खायल निगम तेल के आ मूल्य बढा कर जो तमाशा दिखा रहा है वह तो बस भालू है । मदारी तो सरकार है जो डमरु बजा कर अपने जमूरे खायल निगम को ताली पीट–पीट कर नचा रहा है और घायल नागरिक अपनी छाती पीट रहे हैं । यही है ईस देश का असली सिनेमा हम सब तमाशबीन बनने के लिए अभिशप्त हैं ।

