नेपाल भारत संबंध को प्रोटोकॉल में ही सिमित नहीं, दिल्ली में छा गए देउबा फोटो सहित
दिल्ली से टिंकू । नेपाल के प्रधानमन्त्री श्री शेरबहादुर देउवा १ अप्रैल से ३ अप्रैल २०२२ तक तीन दिनों के भारत यात्रा पर हैं । पांचवी बार प्रधानमन्त्री बने देउवा के इस कार्यकाल का यह पहला भ्रमण है । अपने कैबिनेट के ४ सहयोगी, सरकारी उच्च पदस्थ अधिकारी और उद्योगी व्यापारियों की टोली के साथ भारत पहुँचे प्रधानमन्त्री देउवा का दिल्ली के विमानस्थल पर भारत सरकार के रक्षा एवं पर्यटन राज्यमन्त्री अजय भट्ट ने स्वागत किया था ।
सदभाव भ्रमण पर दिल्ली पहुँचे देउवा से भारत के विदेश मन्त्री डा. एस जयशंकर और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सल्लाहकार अजीत डोभाल ने शिष्टाचार मुलाकात की है । शनिबार को प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में औपचारिक मुलाकात करने वाले हैं । शनिबार अर्थात् वर्ष प्रतिपदा के दिन नेपाल और भारत के बीच पहली रेल सेवा का संयुक्त उद्घाटन दोनों देशों के प्रधानमन्त्री करने वाले हैं । भारत बिहार के जयनगर से लेकर नेपाल के जनपुरधाम तक भारत सरकार के सहयोग से रेल लाइन का निर्माण किया गया है और भारत के ही तकनिकी सहयोग से इसका संचालन वर्ष प्रतिपदा के दिन से होने जा रहा है ।
इस रेल सेवा संचलान होने से नेपाल और भारत के बीच जन जन के बीच का संपर्क और सबंध और अधिक प्रगाढ़ होने की उम्मीद है । इस रेल सेवा के शुभारम्भ होने से दोनों देशों के सीमावर्ती लोगों को तो फायद होगा ही साथ ही इसके धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृति रुप से भी इस क्षेत्र का महत्व बढ़ेगा । रामायण सर्किट का हिस्सा होने से अब अयोध्या से जनकपुर तक का सीधा रेल संपर्क हो सकेगा । वैसे भारत के तरफ से दिल्ली से काठमांडू को जोड़ने के उद्देश्य से बिहार के रक्सौल से नेपाल की राजधानी काठमांडू तक रेल लाइन निर्माण का वादा भारत सरकार ने किया है और इस समय इसके विस्तृत परियोजना बनाने का काम तेजी से चल रहा है ।
इस बार पहली बार ऐसा हो रहा है कि नेपाल के प्रधानमन्त्री ने भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय का भी भ्रमण किया है । भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जेपी नड्डा के निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए भाजपा मुख्यालय पहुँचने पर खूद राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा ने प्रधानमन्त्री सहित उनके प्रतिनिधि मण्डल का स्वागत किया था । भाजपा मुख्यालय में आनेवाले देउवा पहले विदेशी सरकार प्रमुख हैं । हालांकि वामपंथी विचारधारा के प्रभुत्व वाले नेपाली राजनीतिक वृत्त में देउवा के भाजपा मुख्लायय के भ्रमण को लेकर विभिन्न टीका टिप्पणी की जा रही है ।
यहां यह समझना आवश्यक है कि नेपाल और भारत के बीच जो विशेष संबंध है, वह कूटनीति और राजनीतिक संबंध से कहीं बढ़कर है । इन दिनों देश के बीच में प्रोटोकॉल कोई मायने नहीं रखता है । जब भारत के प्रधानमन्त्री मोदी नेपाल आते हैं तो उन्हें औपचारिक समारोह और प्रोटोकॉल से अधिक सड़कों पर घंटो खड़े रहे आम जनता के बीच जाकर उनका अभिवाद स्वीकार करने में आता है जो घंटो से सड़क किनारे खड़े रहते हैं । अपने हर यात्रा में में वे भगवान पशुपतिनाथ में विशेष पूजा करते हैं तो कभी मुक्तिनाथ का दर्शन करने और कभी जानकी मंदिर में दर्शन करते समय उनके चेहरे पर एक अलग ही भाव दिखाई देता है ।
इसी तरह नेपाल के प्रधानमन्त्री का भी भारत भ्रमण को सिर्फ दोनों देशों के बीच रहे समस्याओं, विवादों, व्यापार और परेशानी के लिए नहीं होना चाहिए । नेपाल में एक मानसिकता बनाया गया है कि जब जब नेपाल के किसी भी प्रधानमन्त्री का दिल्ली भ्रमण होता है तो अचनाक से भारत के बीच सीमा समस्या को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाता है । दोनों देशों के बीच हुए संधी समझौते पर सवाल खडा किया जाता है । व्यापार घाटा की चर्चा की जाती है । जबकि नेपाल और भारत का संबंध इन सबसे कहीं ऊपर उठ कर है । आजकल नेपाल में एक भाष्य तैयार किया जा रहा है कि नेपाल और भारत के बीच रोटी बेटी के संबंध की बात नहीं करनी चाहिए सिर्फ रोजगार और व्यापार की बात की जानी चाहिए रोटी बेटी का राग बहुत पुराना हो गया है । आज के अर्थयुग में रोजगार और व्यापार की बात हो, यह एक गलत भाष्य है और इस तरह की बातें करने वालों का एक ही उद्देश्य होता है कि नेपाल और भारत के बीच जो एक अलग तरह का अदभूत संबंध है, उस पर प्रकार किया जाए उसे खत्तम किया जाए ।
आखिर क्यों दोनों देशों के संबंध को पूरी दुनिया से अलग, अदभुत और अद्वितीय क्यों कहा गया है ? क्योंकि इन दोनों देशों के बीच सिर्फ कूटनीतिक और राजनीतिक संबंध नहीं है । हमारे बीच पारिवारिक संबंध है, हमारे बीच वैवाहिक संबंध होता है । हमारे बीच धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, अध्यात्मिक, पौराणिक सभी तरह के सबंध हैं, तो हम सिर्फ रोजगार और व्यापार की बातें क्यों करे ? क्यों नेपाल और भारत के प्रधानमन्त्री की यात्रा में औपचारिकता ही ढूंढेÞ ? क्यों हमारे इस विशिष्ट संबंध को हम प्रोटोकॉल की घेराबंदी में बांध कर रखें ? क्यों दोनों देशों के प्रधानमन्त्री जब मिले तो सिर्फ समस्या और विवाद की बात करें ?
हमारा संबंध तो ऐसा होना चाहिए कि भारत के प्रधानमन्त्री की जब भी इच्छा हो तो वह किसी भी समय भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन करने आ सकते है । मुक्तिनाथ के दर्शन के लिए जा सकते है । भगवान् गौतम बुद्ध की जनस्थल आने में उनको किसी औपचारिकता और प्रोटोकॉल की जरुनत ना पड़े । इसी तरह नेपाल के प्रधानमन्त्री जब चाहे बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी जा सकते हैं । काली के दर्शन के लिए कोलकत्ता और कामख्या के दर्शन करने के लिए आसाम जा सकते हैं । दक्षिण भारत के तीर्थस्थालो पर जाने में किसी प्रोटोकॉल की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए । जिस दिन इस विचार के साथ दोनों देशों का नेतृत्व आगे आएगा, बांकी सभी समस्याएं अपने आप में समाप्त हो जाएगी ।

अभी फोटो : टिंकू





