Thu. Sep 24th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

प्रकृति से सामंजस्य के कारण नव-संवत्सर सर्वश्रेष्ठ काल-गणना : डॉ रमेश यादव

 

मनुमुक्त ‘मानव’ ट्रस्ट द्वारा अंतर्राष्ट्रीय नव-संवत्सर समारोह आयोजित

नारनौल। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा विक्रम संवत-2079 के सुअवसर पर ‘वर्चुअल अंतरराष्ट्रीय नव-संवत्सर समारोह’ का आयोजन किया गया, जिसमें छह महाद्वीपों और नौ देशों के विद्वानों में सहभागिता की। सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के कुलपति डॉ उमाशंकर यादव की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, रोहतक (हरियाणा) के कुलपति डॉ रमेश यादव मुख्य अतिथि थे, वहीं महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल के संस्थापक कुलपति डॉ श्रेयांश द्विवेदी और केलानिया विश्वविद्यालय, केलानिया (श्रीलंका) के पूर्व कुलपति डॉ लक्ष्मण सेनेविराठने विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। चीफट्रस्टी डॉ रामनिवास ‘मानव’ के प्रेरक सान्निध्य और डॉ पंकज गौड़ की कुशल संचालन में संपन्न हुए इस समारोह में डॉ मोना कौशिक, सोफिया (बल्गारिया), कल्पना लालजी, वाक्वा (मॉरीशस) और शिखा रस्तोगी, बैंकॉक (थाईलैंड) ने नव-संवत्सर के महत्त्व एवं वैज्ञानिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला, वहीं डॉ भावना कुंअर, सिडनी (ऑस्ट्रेलिया), डॉ श्वेता दीप्ति, काठमांडू (नेपाल), डॉ अंजलि मिश्रा, कोलंबो (श्रीलंका), अंजू घरभरन, मोका (मॉरीशस), सुरेश पांडे, स्टॉकहोम (स्वीडन), डॉ कमला सिंह, सेन डियागो (अमेरिका), डॉ शिवकुमार निगम, पोर्ट ऑफ स्पेन (त्रिनिडाड), डॉ रमाकांत शर्मा, भिवानी (हरियाणा) और डॉ ऋचा शर्मा, अहमदनगर (महाराष्ट्र) ने नववर्ष पर केंद्रित अपनी मधुर कविताओं द्वारा कार्यक्रम को रसमय बना दिया।
*किसने क्या कहा :* इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ रमेश यादव ने अपने संदेश में कहा कि सृष्टि और प्रकृति से सामंजस्य के कारण विक्रमी संवत्सर सर्वश्रेष्ठ काल-गणना है। वैज्ञानिकता के कारण ही विश्व-भर में इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। विशिष्ट अतिथि डॉ श्रेयांश द्विवेदी ने नव-संवत्सर को ‘विश्व कल्याण-दिवस’ बताते हुए कहा कि इस दिन हिंदू मानव मात्र के कल्याण की कामना करते हैं। दूसरे विशिष्ट अतिथि डॉ लक्ष्मण सेनेविराठने ने भारतीय विक्रमी संवत को एशिया का नववर्ष बताते हुए कहा की एशिया के सभी देशों में नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास में ही होती है। इसे मनाने का दिन और ढंग भिन्न हो सकता है, लेकिन भावना एक ही है। अध्यक्षीय वक्तव्य डॉ उमाशंकर यादव ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि अंग्रेजी नववर्ष के चक्कर में हमने अपने नववर्ष को भुला दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर ही भारत के प्राचीन गौरव की पुनर्प्रतिष्ठा की जा सकती है।
*ये रहे उपस्थित :* लगभग दो घंटों तक चले इस महत्त्वपूर्ण समारोह में ट्रस्टी डॉ कांता भारती, प्रो सिद्धार्थ रामलिंगम और विश्वबैंक, वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) की अर्थशास्त्री डॉ एस अनुकृति, काठमांडू (नेपाल) की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘हिमालिनी’ के प्रबंध-संपादक सच्चिदानंद मिश्र, सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के कवि प्रगीत कुंअर, सोफिया (बुल्गारिया) की गेब्रियला मारकोवा, पोर्ट ऑफ स्पेन (त्रिनिडाड) की सविता निगम, हरियाणा बाल कल्याण परिषद्, चंडीगढ़ के राज्य नोडल अधिकारी विपिन शर्मा, चेन्नई (तमिलनाडु) की हिंदी-सेवी डॉ राजलक्ष्मी कृष्णन, होडल की डॉ मनोरमा देवी, पलवल की डॉ प्रियंका कुमारी और नारनौल के कृष्णकुमार शर्मा, एडवोकेट, पुष्पलता शर्मा, गरिमा गौड़ और ललित कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com