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देश की समृद्धि से ही भाषा का होगा विकास : माधव नेपाल

 


जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर ।देश समृद्धि से ही भाषा का विकास हो सकता है। भले ही हम समुदाय, जाति में वंटे है लेकिन पहले हम नेपाली है उपयुक्त वातें पूर्व प्रधानमंत्री तथा नेकपा एमाले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष माधब कुमार नेपाल ने 6अप्रैल वुधवार को जनकपुरधाम में आयोजित तीन दिवसीय जनकपुरधाम साहित्य कला, नाट्य महोत्सव 2078के उद्घाटन समारोह में प्रमुख अतिथि पद से वोलते हुए कहीं। उन्होंने आगे कहा कि नेपाल में नेपाली के वाद मैथिली सवसे अधिक वोली जाती है लेकिन राज्य पक्ष ने भेदभाव किया है। माधव नेपाल ने आगे कहा कि प्रजातंत्र आन्दोलन में मैं धनुषा जिला में लंवे समय तक रहा हूं। मैं मधुर मैथिली तथा कल्चर को नजदीक से देखा हूं। इसी दौरान मैने मैथिली वोलना सीखा।
कार्यक्रम में मधेश के मुख्यमंत्री मो. लाल बाबू राउत ने कहा कि मैथिली भाषा की समृद्धि के लिए प्रयासरत हूं। प्रदेश प्राज्ञ प्रतिष्ठान का गठन अंतिम दौर में है। इसके स्थापना मैथिली भाषा, कला संस्कृति तथा नाटक का और सवल होगा।
मधेश प्रदेश के वन, उद्योग तथा पर्यटन मंत्री शत्रुघ्न महतो ने कहा कि मिथिला पेंटिंग विश्व में पहचान वनायी है। मधेश के जानकी मंदिर, सलहेश स्थान सहित अन्य ऐतिहासिक मंदिर, सरोवर को संरक्षण एवं संरक्षण किया जाएगा।
जीवनाथ चौधरी की अध्यक्षता में शुरू हुयी उद्घाटन समारोह से पूर्व मिथिला संस्कृति से जुड़ी झांकियां वारहवीघा से निकाली गईं। इस दौरान 2077डा.धीरेन्द्र साहित्य पुरस्कार भाषाविद डा. रामावतार यादव तथा सलहेश पुरस्कार गायक डा. आभाष लाभ कर्ण को इसी तरह 2078का डा. धीरेन्द्र साहित्य पुरस्कार महेन्द्र मिश्र को तथा सलहेश पुरस्कार कलाकार रामा देवी को प्रदान किया गया। इस अवसर पर एमाले समाजवादी पार्टी के बरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री राम चंद्र झा, रमेश रंजन झा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर साहित्यकार तथा पत्रकार सुजीत अपनी लिखी पुस्तक पुनि पुनि होत विवाह माधव नेपाल को भेट किया। पुस्तक देखकर माधव नेपाल रोमांचित हो गये। उद्घाटन सत्र के वाद द्वितीय सत्र में सत्ता में रमल विद्रोह तथा नेपाली साहित्य में मिथिला मधेश पर विद्वानों द्वारा परिचर्चा की गयी। रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन किया गया जिसमें भारत से आए गायिका पूनमझा सहित अन्य कलाकारों ने दर्शकों को भरपूर मनोरंजन दिया।

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