सियासी दंगल
दशे मे आम चनुाव समय पर हागेा या नहीं और अगर चुनाव हुआ तो यह कितना सफल और शान्तिपर्ूण्ा होगा, इसकी कोई ग्यार ेन्टी नहीं है । लेकिन काठमांडू की गद्दी पाने के लिए सियासी दंगल जारी है । देश एक ऐसे वातावर ण से गुजर र हा है, जहाँ इस समय अन्य बाते गाण् ह, चनुाव ही मख्य है । हर आरे गहमा- गहमी शुरु हो गई है । चुनाव अच्छी हो या बुरी, लेकन लाके तन्त्र मे चनुाव हानेा अनिवायर् है ।तभी तो र्सार्त्र जैसे महान् विचार क का कहना है कि चनुाव के द्वारा उन लागे का पकडना हाते
है जिन्हानं हमे बवेकपू बनाया है । जनता आरै उसके प्रि तनिधियाे की आखँ मिचानैी विगत बीस वषार्ंे से चल र ही है । हर बार यही हातेा है कि दसू र का जीतन वाली जनता पा्र यः खदु हार जाती है । अभी तक हवा किसी की नहीं है, कल कोई आँधी चल जाए यह दूसर ी बात है



