बिना किसी परिमार्जन के अध्यादेश ज्यों का त्यों भेजा गया

काठमांडू, बैशाख २१ – सरकार ने संवैधानिक परिषद् (पहला संशोधन) अध्यादेश २०८३ में बिना किसी परिमार्जन के पुनः प्रमाणीकरण के लिए राष्ट्रपति के समक्ष भेजने का निर्णय किया है । सोमवार को हुए मंत्रिपरिषद् की बैठक ने उक्त अध्यादेश को ‘हुबहु’ आगे बढ़ाने का निर्णय किया है ।
वैसे रविवार को राष्ट्रपति ने उक्त अध्यादेश को पुनर्विचार करने की आवश्यक है कहकर सरकार को वापस भेज दिया था । लेकिन सरकार ने राष्ट्रपति के सुझाव अनुसार उसमें किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं कर पुराने मसौदे को पुनः सिफारिश करने का निर्णय लिया है । इसकी जानकारी सरकार के प्रवक्ता एवं शिक्षामंत्री सस्मित पोखरेल ने दी है ।
उन्होंने कहा कि ‘संवैधानिक परिषद् पहला संशोधन अध्यादेश २०८३ सम्माननीय राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार के लिए वापस किए जाने के बाद, उक्त अध्यादेश को जारी करने के लिए पुनः सम्माननीय राष्ट्रपति के समक्ष सिफारिस करने का निर्णय लिया गया है ।’
पत्रकारों द्वारा यह प्रश्न करने पर कि क्या अध्यादेश में कोई सुधार किया गया है या ज्यों का त्यों भेजा गया है ? इस प्रश्न के जवाब में मंत्री पोखरेल ने कहा कि ‘जैसा पहले था वैसा ही भेजा गया है । ज्यों का त्यों भेजा गया है, कोई परिमार्जन नहीं किया गया है ।’

