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नेपाल में सभी भाषाओं को राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त है फिर भारत में क्यों नहीं?

 

नोहर(हनुमानगढ़)/जयपुर.राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलनी चाहिए। नेपाल में तो सभी भाषाओं को राष्ट्रीय भाषा को दर्जा प्राप्त है फिर भारत में क्यों नहीं? यह कहना है नेपाल के पर्यावरण मंत्री हेमराज तातेड़ का।

एक दिवसीय निजी दौरे पर नोहर आए तातेड़ ने यहां ‘भास्कर’ से खास बातचीत में कहा कि राजस्थानी भाषा को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन का वे नैतिक समर्थन करते हैं क्योंकि वे खुद राजस्थानी हैं और मारवाड़ी बोलते हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल सरकार में मंत्री चुने जाने के बाद उन्होंने राजस्थानी भाषा में ही शपथ ग्रहण की थी।

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राजस्थानी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मामला हालांकि भारत सरकार का है लेकिन वे प्रयास कर रहे हैं कि नेपाल में राजस्थानी सहित बोली जाने वाली अन्य भाषाओं को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिया जाए। तातेड़ ने कहा कि जब वे विदेश में रहकर अपनी भाषा में शपथ ले सकता हूं तो प्रदेश के लोगों को इसमें संकोच नहीं करना चाहिए।

नेपाल को है भारत के हितों की चिंता :

पत्रकारों से बातचीत में तातेड़ ने कहा कि भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नेपाल की धरती का उपयोग नहीं होने दिया जाएगा। भारत सहित अपने पड़ोसी देशों के साथ मैत्री संबंध व मजबूत करने के लिए नेपाल और नीतियां बना रहा है।

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उन्होंने कहा कि राजस्थानी जैसी समृद्ध भाषा को मान्यता के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है यह दुर्भाग्यपूर्ण है। पर्यावरण मंत्री हेमराज तातेड़ द्वारा राजस्थानी भाषा के पक्ष दिए गए इस बयान का भाषा प्रेमियों ने स्वागत किया है।

राणा के मीडिया चेयरमैन प्रेम भंडारी ने दूरभाष पर मंत्री से बात कर उनका आभार व्यक्त किया तथा उन्हें अमेरिका आने का निमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि मंत्री ने उन्हें नेपाल आने का न्यौता दिया ताकि इस मुद्दे पर खुलकर व विस्तृत चर्चा हो सके।

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उधर अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के प्रदेश महामंत्री डॉ. सत्यनारायण सोनी, संस्थापक अध्यक्ष डॉ. भरत ओत्त, प्रदेश प्रचारमंत्री विनोद स्वामी, मोट्यार परिषद के जिलाध्यक्ष अनिल जांदू, चिंतन परिषद के संभाग संयोजक महेंद्र प्रताप शर्मा सहित अनेक भाषा प्रेमियों ने तातेड़ के बयान पर खुशी जताई है।Dainik Bhaskar

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