Sat. Aug 1st, 2026
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मोदी के लिए मौका और मुश्किलें

 

बहुत साल पहले अमोल पालेकर की एक फिल्म आई थीः ‘थोडÞा सा रूमानी हो जाएं’ । इस फिल्म में संवाद कविता के रूप में थे । नाना पाटेकर बारि शकर नाम के एक किर दार में थे जो सूखाग्रस् त इलाकों में बारि श कर वाने का दावा कर ता है । नाना पाटेकर का एक डायलाँग था- जब उम्मीद की कलियां मुर झाती हैं, जब सपनों का झर ना सूखता है, तब मैं आता हूं और बरस जाता हूं ।

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