अजीब दास्ताँ है (चुनाव चिंतन) : सुदर्शन लाल कर्ण

जनकपुर धाम
जनकपुर धाम । नेपाल मे चुनाव का महा पर्व है। सम्पूर्ण देशवासी इस महा पर्व मे व्यस्त है जिसे स्वाभाविक ही कहा जा सकता है। दूसरी ओर विश्व महा युद्ध के संकट से घिर गया है। तृतीय विश्व युद्ध का संसार के विकसित देश की ओर से धमकी है ही। उधर रूस और उक्रेन का महा युद्ध तो है ही इधर अफगानिस्तान मे तालिबानियों और पाकिस्तान का भी अनबन है,युद्ध की स्थिति मे है और समाचार अनुसार युद्ध हो भी रहा है। चीन भी इस समय पाकिस्तान से खफा है। नेपाल इन देशो से दूर नही है। फिर इस समय के राजनीति माहौल मे नेपाल तटस्थ नही हो पाया है। तो हम नेपाली को भी सोचने का समय है। सतर्क होने का समय भी है। अन्तराष्ट्रीय राजनैतिक गतिविधियों को देखते हुए हमे भी सावधान रहना ही होगा। नेपाल के राजनैतिक नेतृत्वकर्ता इमानदार नही है। तो राजनैतिक अभिभावक बेईमान हो तो हम सोचने के लिए मजबूर है।


