Tue. Jun 23rd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

चुनावी चक्रव्युह: अंशुकुमारी झा

 
अंशु कुमारी झा

अंशुकुमारी झा, हिमालिनी मासिक, मई (२०२२) अंक से
‘जो राजनीति में संलग्न नहीं होता उस पर असक्षम शासन करते हैं ।’ –प्लेटो
इसी माह के अन्त में अर्थात वि.सं.२०७९, ०१, ३० गते को सम्पूर्ण नेपाल में एक ही चरण में स्थानीय चुनाव होने जा रहा है । जिसमें राष्ट्र की सभी पंजीकृत पार्टियां तथा कुछ नेतागण स्वतन्त्र रूप से भी चुनाव लड़ रहे हैं । उक्त चुनाव में मेयर, उपमेयर से लेकर गाँवपालिका के सभी पदों पर चुनाव लड़ा जायेगा । जो जीतेगा वो पांच वर्षों तक शासन चलाएगा । चुनाव जीतने के लिए भिन्न भिन्न पार्टी भिन्न भिन्न पैतरें अपना रही हैं । आखिर चुनावी चक्रव्युह में जनता को फंसाना है न ।
एमाले “समृद्ध और सबल नेपाल निर्माण” का नारा लेकर क्रियाशील है तो नेपाली कांग्रेस “लोकतन्त्र का स्थायित्व और आर्थिक समृद्धि” का नारा लेकर घूम रही है । उसी प्रकार माओवादी का प्रचार है, “व्यवस्था नहीं, अब अवस्था परिवर्तन” होगा और जसपा “पहचान, संघीयता तथा सुशासन” का गीत गा रही है । फिलहाल नेपाल के राजनीतिक बाजार में चुनाव का व्यापार बहुत ही गरम है । इस व्यापार में सत्तासीन गठबन्धन से लेकर सत्ता के लिए लालायित सारे दल उछल कूद कर रहे हैं । देश भर में बहुत सारे चुनावी चक्रव्युह बिछाए जा रहे हैं । न जाने किस चक्रव्युह में अधिक जनता फंसेगी और उसे जनता को प्रताड़ित करने का अधिकार मिलेगा । चुनाव के समय में जनता को फंसाने के लिए दलों ने इतनी सारी प्रतिबद्धता जाहिर की है कि उसे पूर्ण करना लोहे के चने चबाने जैसा है । उनमें से कोई तो मेट्रो रेल चलाने तो कोई केबलकार लगाने की बात कर रहा तो पार्क तथा भ्यु टाबर बनाने की बात कर रहा है । सबसे आश्चर्यजनक तो यह लगा कि एक महिला नेतृ ने कहा कि अगर हमें जिताओगे तो हम महिलाओं के हित के लिए कार्य करेंगे अर्थात महिला को जब महिनावारी होगी तो उसे चार दिनों की छुट्टी मिलेगी । अब लो, जब महिला अपने आपको कमजोर नहीं समझती, वो चार दिन भी प्राकृतिक वरदान समझकर पुरुष के कंधा से कंधा मिलाकर काम करना चाहती तो उसे छुट्टी की आवश्यकता ही क्यों पडेÞगी ? अगर महिला के हित के लिए ही कुछ करना है तो उसे उसका ३३ प्रतिशत अधिकार जो संविधान से प्राप्त हुआ है वो दिलाने के लिए तत्पर होने से कुछ कहा भी जा सकता ।
चुनाव के दौरान किए गए वादे कार्यान्वयन होता तो नहीं, सारी बातें हवा ही तो होती है जो चुनाव अवधि भर जत्र तत्र सवैत्र फैलाया जाता है और बाद में हवा में ही कहीं विलीन हो जाती है । जो जितना बोलेगा, जो जितना जाल बिछाएगा, जितना दाना डालेगा, पंछी तो वहीं जाकर फंसेगा । राजनीति के व्यापार में विकास का नाम बेचकर विश्वास हासिल किया जाता है जो जीतने के बाद चकनाचूर कर दिया जाता है ।
हमारे समाज में विकास के प्रति बहुत अन्धविश्वास है । अगर कोई अदना सा नेता भी विकास का डींग हांके तो नेपाली जनता बड़ी आसानी से मान लेती है । इसका मुख्य कारण है नेपाली जनमानस में दल प्रति की भक्ति । इसलिए तो मतदाता का मत जीतने में भक्ति दल सफल हो जाता है । जो भी हो, चुनावी बातें सुनकर आम जनता को मजा तो बहुत आता है । चुनावी नारा तथा घोषणापत्र के सम्बन्ध मे अश्लील आरोप प्रत्यारोप की चुनावी बाजार में कमी नहीं है । कोई कहता कि किसी ने मेरा नारा चुरा लिया है तो कोई कहता है कि बालकोट जाकर ट्युशन पढाने की आवश्यकता आ गई है । कोई कहता है कि साम, दाम, दण्ड, भेद तथा टोना टोटका से चुनाव जीतने का प्रयत्न कर रहा है तो कोई कह रहा है कि गायत्री मन्त्र और ब्राम्हण भोजन कराकर चुनाव जीतने का सपना देख रहा है । फलस्वरूप पक्ष विपक्ष के अस्वस्थ विचार से जनमानस में अस्वस्थ प्रभाव पड़ रहा है । चुनाव जीतने के लिए इतना हद तक नहीं जाना चाहिए जिससे जनता पर गलत प्रभाव पड़े । सोसल मीडिया में बहुत सारे विडियो वाइरल हो रहे हैं जिसमें कुछ लोग शराब पीकर सड़क पर, तो कुछ नाली में अव्यवस्थित तरीके से पड़ा दिखाई दे रहा है तो कुछ युवा मोटसाइकिल सहित शराब के नशे में दुर्घटना की तरफ जा रहे हैं जो कि निंदनीय है । कोई छोटे छोटे नाबालिग बच्चों से अपने पार्टी के झण्डा लगवा रहा है, यह दृश्य कानून विरुद्ध है । और भी बहुत दुषित घटनाएं चुनावी माहौल को गंदगी से परिपूर्ण कर रही है ।
समग्र में इस चुनावी चक्रव्युह में हमें सोच समझकर फंसना है । क्योंकि एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है कि वो एक असल और ईमानदार व्यक्ति का चयन करें । अगर हम एक ईमानदार व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी सौंपेंगे तो वो हमें विकास के तरफ अग्रसर करेगा क्योंकि अब जिसे हम जितायेंगे वो आने वाले पांच वर्षों तक सत्तासीन रहेगा और स्थानीय निकाय वही चलाएगा । चुनाव में युवाओं की भूमिका अग्रगण्य होती है क्योंकि भविष्य का कर्णधार युवा ही तो होता है । इसलिए युवाओं को चुनाव प्रति अत्यधिक जागरुक होना चाहिए । अतः हम सभी को अपना मताधिकार का सदुपयोग करना चाहिए । –हिमालिनी मासिक, मई (२०२२) अंक से

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *