मोरारी बापू का जनकपुरधाम में सीता की भूमिका के साथ कथा प्रारंभ
मोरारी बापू ने कहा कि हर पुरुष को राम तथा हर नारी को सीता वनना चाहिए
जनकपुरधाम (नेपाल), मिश्री लाल मधुकर, 21 मई । जनकपुरधाम के तिरहुतिया गाछी में शनिवार से मानस जय सिया राम कथा की शुरुआत पूज्य संत मोरारी बापू द्वारा किया गया। शनिवार की कथा में जनकपुरधाम तथा सीता की महत्ता पर बिशेष कथा में चर्चा किए। उन्होंने कहा कि माता सीता शांति है तो राम बिश्राम है। मनुष्य जव अध्यात्म की पराकाष्ठा पूरा कर लेता है तो उसे शांति अर्थात सीता मिलती है। वहीं अध्यात्म की शिखर पर पहुंचने के वाद वे बिश्राम यानी राम को पा लेते हैं। मोरारी बापू ने कहा कि जनकपुरधाम के रज रज में सिया राम है। जनकपुरधाम के लोग धन्य है जो उन्हें जनकपुरधाम में जन्म हुआ है। जनकपुरधाम अर्थात मिथिला के रहन, सहन, बेष, भूषा, भाषा सभी अलौकिक है। प्रभु राम को जनकपुरधाम में इतने स्वागत हुए कि वे अयोध्या को भूल से गए थे। मोरारी बापू ने कहा कि “जनक सूता जग जननी जानकी। अति सय प्रिया करूणा निधान की”!
मोरारी बापू ने कहा कि राजा जनक के दरवार में विद्वान तथा विदूषी की कमी नहीं थी। एक से एक विद्वान थे। उस पावन भूमि में उनकी कृपा से ही कथा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।मोरारी बापू ने कहा कि हर पुरुष को राम तथा हर नारी को सीता वनना चाहिए। अर्थात पुरुष अपनी पत्नी को सम्मान करें। पर नारी के प्रति सपने में भी न सोचें। इसी प्रत्येक नारी को सीता वनना चाहिए। अर्थात पतिव्रता बनना चाहिए।













