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प्रेम अगर सच्चा हो तो सफलता अवश्य मिलती है : मोरारी बापू, बापू के हाथ में हिमालिनी

 


जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर
प्रेम अगर सच्ची हो तो सफलता मिलना तय है। उपयुक्त बातें जनकपुरधाम के तिरहुतिया गाछी में शनिवार को कथा के आठवें दिन ब्यासपीठ से कहीं। बापू ने कहा कि प्रेम तीन तरह के होते हैं। पहला प्रेम गुप्त प्रेम है। जैसे जगत जननी सीता तथा मर्यादा पुरुषोत्तम राम के बीच गुप्त प्रेम था। दुसरा प्रेम सुप्त प्रेम होता है। यह प्रेम राजा जनक का था। वे विदेह थे लेकिन माता सीता (जानकी) के आने के बाद पुत्री की प्रेम में जनक जी फंस गये। राम के सीता के पाणिग्रहण के बाद उनका सुप्त प्रेम और बढ गया। हर पिता को सुप्त प्रेम होता हैं। तीसरा प्रेम क्षुब्ध प्रेम होता है। क्षुब्ध प्रेम सूर्पनखा के साथ था। जिसके कारण उनको लक्ष्मण के हाथो नाक कटवानी बनीं। इस लिए क्षुब्ध प्रेम से बचना चाहिए। बापू अपनी कथा प्रारंभ करने से उन्होंने खुशी जाहिर किया कि सुप्रीम कोर्ट ने सेक्स बर्कर को सम्मान पूर्वक जीने के अधिकार तथा पुलिस को कारबाई रोकने का फैसला सुनाया हैं। रेत की समाधि के लिए गीतांजली को इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार मिलने पर ब्यास पीठ से बधाई दी। लेकिन बापू लद्दाख के तुतर्क नदी मेंबस गिरने से सात जबान के मारे जाने उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त किए तथा प्रत्येक परिवार को पांच पांच हजार रुपये अपने शिष्य रमेश को उपलब्ध कराने को कहा। मोरारी बापू शनिवार को शिव बिवाह तथा राम जन्म के बारे में ब्यासपीठ से जानकारी करवाये। ‘मन बुद्धि बर बाणी अगोचर प्रगट कबि कैसे कैरे। सिय राम अव लोकनि पर्स पर प्रेमु काहू न लखि परै’
बापू ने इशारों इशारों में कहा कि काशी की काशी का ज्ञानवापी में सब साक्ष्य मौजूद 30मई को दूध का दूध पानी पानी हो जाएगा।
बापू ने कहा कि जनकपुरधाम कथा उनके जीवन का प्रमुख कथा है। राजा जनक के नगर जनकपुरधाम में कथा करने से अपने को धन्य मानता हूं। उन्होंने कहा कि मिथिला की बाणी, मिथिला का पानी तथा मिथिला का मेहमानी सौभाग्य बालो को ही मिलता है।

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