Sun. May 24th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

देश की परियोजना में चीनी मजदूर और देश के युवा विदेश जाने के लिए मजबूर

 

पिछले महीने  एक लोडर दुर्घटना में तीन चीनी नागरिकों की मौत हो गई थी । उसके बाद से यह चर्चा में है कि नेपाली मजदूरों की जगह चीन के लोगों को यहाँ काम पर लगाया जा रहा है ।  जिसके कारण हिमालयी राष्ट्र के लोग रोजगार से वंचित हो गए हैं।  काठमांडू-तराई (मधेश) फास्ट ट्रैक पर लोडर दुर्घटना से पता चला है कि उनमें से बड़ी संख्या में परियोजना में चीनी कार्यरत हैं जबकि परियोजना में केवल कुछ नेपाली तकनीशियन कार्यरत हैं।

अभी इस बात का खुलासा नहीं किया गया है कि नेपाल में कितने चीनी नागरिकों ने प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए वर्क परमिट हासिल किया है।  इसके अलावा राष्ट्रीय प्राइड परियोजना के ठेकेदार नेपाल सेना ने यह खुलासा नहीं किया है कि कितने विदेशी तकनीशियनों को लेबर परमिट दिया गया है।

यह भी पढें   बहुमत का परीक्षण - डा. विधुप्रकाश कायस्थ

नेपाल में बड़ी संख्या में इंजीनियर घर बैठे अपनी नौकरी खो रहे हैं, मजदूरों को बिना नौकरी के विदेश जाने को मजबूर किया जा रहा है, और दूसरी तरफ बड़ी संख्या में चीनी नागरिकों को नेपाल में राष्ट्रीय प्राइड की परियोजनाओं में लगाया जा रहा है।

फास्ट ट्रैक बीमा के संबंध में ठेकेदार से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पैकेज 1 और पैकेज 2 का अभी तक बीमा नहीं किया गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि चीनी ठेकेदार नौ महीने से जोर दे रहा है कि बीमा उसकी पुनर्बीमा कंपनी के तहत चीन में होना चाहिए। इसलिए बीमा में देरी हो रही है।

यह भी पढें   मधेश क्यों पिछड़ रहा है ? : राकेश मिश्रा

फास्ट ट्रैक एक परियोजना है जिसे नेपाल सेना द्वारा चलाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार चीनी ठेकेदार राष्ट्रीय बीमा समिति के बजाय निजी क्षेत्र के नेपाल बीमा, सनिमा बीमा और प्रीमियर बीमा से बीमा प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है। अनुबंध को रद्द करने के लिए रक्षा मंत्रालय को संसदीय लेखा समिति के एक पत्र की अवहेलना में अनुबंध दिया गया था।

प्रस्तावित 72.6 किलोमीटर काठमांडू-तराई-मधेश एक्सप्रेस-वे के लिए अनुबंधित कंपनियों का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। इससे काम समय पर पूरा होने की आशंका पैदा हो गई है। समय पर माल नहीं दे पाने, कंपनियों के सलाहकार विवादों में पड़ रहे हैं और बीमा और पुनर्बीमा की समस्या से फास्ट ट्रैक काम में दिक्कत हो रही है।

यह भी पढें   कूटनीतिक दलदल में  प्रधानमंत्री बालेन्द्र साह : अजयकुमार झा

मंत्रिपरिषद ने अप्रैल 2017 में नेपाल सेना को फास्ट ट्रैक निर्माण की जिम्मेदारी दी थी। इस राष्ट्रीय प्राइड परियोजना को 2024 के लिए पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना की अनुमानित लागत 175 अरब रुपये है। 76.2 किमी की यह सड़क काठमांडू घाटी को तराई-मधेश से जोड़ने वाली सबसे छोटी सड़क है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *