रंग लाया हिमालिनी का मुहिम.. कमला को बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश
काठमांडू, 4 जून। हिमालिनी द्वारा कमला नदी के दोहन को रोकने की दिशा में आज बड़ी सफलता मिली है । कमला नदी के दोहन को रोकने की मांग के साथ रिट में सर्वोच्च अदालत ने अल्पकालीन अन्तरिम आदेश दियाहै। न्यायाधीश टंकबहादुर मोक्तान के एकल इजलास ने शुक्रबार नदी से बालू पत्थर आदि निकालने से नदी के प्राकृतिक बहाब पर असर पड़ने के कारण ऐसे कार्य को रोकने के लिए सर्वोच्च अदालत नियमावली, २०७४ के नियम ४९ (२) (ख) बमोजिम विपक्षी के नाम में अल्पकालीन अन्तरिम आदेश जारी किया है।
उसी तरह उपर्युक्त विषय में क्या कैसे हुआ है? निवेदक की मांग बमोजिम का आदेश क्यों जारी करना चाहिए? मांग बमोजिम का आदेश जारी नहीं करने करने का आधार सबूत प्रमाण सहित सूचना प्राप्त होने की तिथि के 15 दिन के भीतर लिखित जवाफ पेश करने का आदेश दियाहै। आपको बता दे कमला नदी में दोहन को रोकने के लिए सबसे पहले हिमालिनी ने आवाज उठाई थी । कमला बचाओ अभियान के अभियंता बिक्रम यादव ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को स्वागत किया है और इसे एक बड़ी सफलता बताई है ।
सिन्धुली के सिन्धुलीगढी में उद्गम स्थल होकर सिन्धुली, उदयपुर, सिराहा और धनुषा होकर भारत की ओर बहने बाली कमला नदी का बार बार योजनाबद्ध दोहन होने की बात कहते हुए काठमाडौं स्कु्ल अफ ल में अध्ययनरत प्रतिक नेपाल ने जेठ १७ गते रिट दायर किया था।

रिट में मुख्य मन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् के कार्यालय, मधेस प्रदेश, मुख्य मन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् के कार्यालय बागमती प्रदेश, प्रहरी प्रधान कार्यालय, प्रदेश प्रहरी कार्यालय और सिन्धुली, धनुषा और सिरहा के स्थानीय तह और जिला समन्वय समिति को विपक्षी बनाया गया है ।


