सांस्कृतिक संबंधों द्वारा पूरे विश्व को जोड़ रहा है भारत : डॉ नूतन पांडेय
नारनौल। आज जबकि पूरा विश्व भीषण संकटों के दौर से गुजर रहा है, भारत ही विश्व का एकमात्र ऐसा देश है, जो सांस्कृतिक संबंधों द्वारा पूर्व विश्व को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। यह कहना है पूर्व राजनयिक तथा भारतीय सांस्कृतिक परिषद्, रंगून (म्यांमार) की नवनियुक्त निदेशक डॉ नूतन पांडेय का। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा स्थानीय सैक्टर-1, पार्ट-2 स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में आयोजित सम्मान-समारोह में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति अनूठी है तथा मानव मात्र का कल्याण ही उसका एकमात्र उद्देश्य है। पूर्व राजनयिक तथा केंद्रीय हिंदी निदेशालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के सहायक निदेशक डॉ दीपक पांडेय ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी भाषा की चर्चा करते हुए कहा कि भारतवंशी और प्रवासी भारतीयों का हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में योगदान अत्यंत सराहनीय है, लेकिन उसका समुचित मूल्यांकन होना अभी शेष है। इस अवसर पर ट्रस्ट द्वारा डॉ नूतन पांडेय और डॉ दीपक पांडेय को हिंदी भाषा और साहित्य तथा भारतीय संस्कृति के विकास में उनके महत्त्वपूर्ण योगदान के दृष्टिगत अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न और सम्मान-पत्र भेंट कर ‘डॉ मनुमुक्त ‘मानव’ शिखर-सम्मान’ से नवाजा गया। दोनों को सम्मानित करते हुए बीसीजी, वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) के कंसलटेंट प्रोफेसर सिद्धार्थ रामलिंगम में कहा कि आज प्रवासी भारतीयों के कारण न केवल विश्व में भारत के व्यापारिक संबंध मजबूत हो रहे हैं, बल्कि भारत और भारतीयों को बड़े सम्मान की दृष्टि से भी देखा जाता है। अध्यक्षीय वक्तव्य में सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) के कुलपति डॉ उमाशंकर यादव ने दोनों विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि इनके योगदान से प्रवासी साहित्य को विशिष्ट पहचान मिली है तथा अब प्रवासी साहित्य की भी मुख्यधारा के साहित्य के साथ चर्चा होने लगी है। समारोह में विश्व बैंक, वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) की अर्थशास्त्री डॉ एस अनुकृति, चीफ ट्रस्टी डॉ रामनिवास ‘मानव’ और निगरानी समिति के पूर्व अध्यक्ष तथा मनोनीत पार्षद् महेंद्रसिंह गौड़ ने भी अपने विचार व्यक्त किये। अंत में ट्रस्टी डॉ कांता भारती ने सभी आगंतुक अतिथियों का मनुमुक्त भवन पधारने पर हार्दिक आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में ब्रहमप्रकाश ‘मानव’, पूर्व पार्षद्, प्रो हितेश कुमार, कृष्णकुमार शर्मा, एडवोकेट, राजकुमार यादव, एडवोकेट और मुंशीराम रेवाड़ी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।


