दादाओं की दादागिरी
कहा जाता है, देश का भविष्य युवा पीढÞी के हाथों में है। इसीलिए प्रत्येक क्षेत्र में युवकों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ऐसी आवाजें बार-बार सभा- सभारोह और नेता के भाषणों में सुनाइ देती हैं। मगर देखा जाए तो राजनीति में बुजर्ुग लोग ही हाबी हैं। राजनीतिक दलों के युवा संगठनों में भी प्रौढÞ और वृद्ध ही बहुसंख्यक देखे जाते हैं। मजे की बात तो यह है कि ६० वर्षके बुजर्ुग को भी राजनीति में युवा कह कर सम्बोधन किया जाता है।
ऐसी अवस्था में देश के भविष्य के साथ जुडÞी नयी संविधानसभा में कितने युवक सहभागी है – यह देखना रोचक रहेगा। वास्तविकता तो यह है कि संविधानसभा में युवकों की संख्या बहुत ही न्यून है। एक समस्या तो हैः जैसे कितनी उमर के लोगों को युवा कहा जाए – जिसकी उमर ४० वर्षकी है, उन लोगों को युवा कहा जाए तो हाल ही में सम्पन्न संविधान सभा में ऐसे युवक सिर्फ१७ हैं, जो प्रत्यक्ष चुनाव जितकर संविधानसभा में पहुँचे हैं।
अगर युवा अवस्था की हद ४५ वर्षको माना जाए तो यह संख्या ४४ तक पहुँच सकती है। अर्थात् ४१ से ४५ वर्षतक के सभासद् सिर्फ२८ दिखते हैं। और सभी ४५ से ऊपर के हैं। अधिकांश ५० से ६० के हैं। इसलिए ६०१ की भीडÞ में ४४ युवकों की संख्या नगण्य ही मानी जाएगी। हम आशा करें कि ये ४४ युवा ही आज सम्पर्ूण्ा युवार् वर्ग का प्रतिनिधित्व करेंगे। युवा आवाज को संविधानसभा में बुलन्द करनेवाले कौन-कौन हैं, जरा देखा जाए- चुनाव जितने वालों में सब से कम उमर के सभासद् एमाले के ताराकान्त चौधरी हैं। २९ वषर्ीय चौधरी ने सप्तरी- ४ में कांग्रेस के दिनेशकुमार यादव को पर ाजित किया। ४० से कम उमर वाले युवक प्रतिनिधित्व में कांग्रेस से ४, एमाले से ५ और एमाओवादी से ४ हैं। इसी तरह मधेशवादी दलों में से सिर्फ३ सभासद् ४० वर्षसे कम उमर के हैं।
इस तरह संविधानसभा में निर्वाचित होकर पहुँचनेवाले काठमांडू- ४ के ३७ वषर्ीय गगन थापा -नेपाली कांग्रेस), र ौतहट-५ से ३३ वषर्ीय सुनिलकुमार यादव -नेपाली कांग्रेस), सिराह-६ से ३५ वषर्ीय गणेशकुमार मण्डल -नेपाली कांग्रेस), काभ्रे- १ से ४० वषर्ीय तर्ीथवहादुर लामा -नेपाली कांग्रेस), धादिङ-१ से ३९ वषर्ीय धनबहादुर
घले -एमाले, डोल्पा-१ से ३९ वषर्ीय धनवहादुर बुढा -एमाले, बैतडी-१ से ४० वषर्ीय दामोदर भण्डारी -एमाले, उदयपुर- २ से ३९ वषर्ीया मञ्जुकुमारी चौधरी – एमाले, रुकुम-१ से ४० वषर्ीय गणेशमान पुन -एमाओवादी), रोल्पा-१ से ३१ वषर्ीया ओनसरी र्घर्ती -एमाओवादी), कैलाली-४ से ३२ वषर्ीय गौरीशंकर चौधरी -एमाओवादी) , मोरङ-४ से ३८ वषर्ीय शिवकुमार मण्डल -एमाओवादी) निर्वाचित हुए हैं।
उसी तर ह धनुषा-४ से ३७ वषर्ीय संजयकुमार शाह -सद्भावना), कपिलवस्तु-५ से ३१ वषर्ीय अभिशेष प्रताप शाह -फोर म नेपाल), कैलाली-१ से ३६ वषर्ीय जनक चौधरी -फोरम लोकतान्त्रिक) ने भी संविधानसभा में प्रतिनिधित्व प्राप्त किया है।
इसी तरह ४१ से ४५ की उमर के कांग्रेस सभासद इस प्रकार हैं- दीपक खड्का संखुवासभा- २, रामहरि खतिवडा ओखलढुंगा- २, रामचन्द्र यादव सिरहा-४, अमर ेशकुमार सिंह र्सलाही-६, बहादुर सिंह लामा नुवाकोट-३, इन्द्र बानिया मकवानपुर-१, शंकर भण्डारी तनहूँ- १, राजीवविक्रम शाही जाजरकोट-२। उसी प्रकार एमाले से शेरधन र्राई भोजपुर- २, विशाल भट्टर्राई खोटाङ-२, यज्ञराज सुनुवार ओखलढुंगा-१, पार्वत गुरुङ दोलखा- १, गणेशकुमार पहाडी सिन्धुली-१, शत्रुघ्न महतो धनुषा-७, जनार्दन ढकाल रसुवा- १, रवीन्द्र अधिकारी कास्की-३, नवर ाज शर्मा म्याग्दी, विकास लम्साल पवर्त- २, कर्ण्र्ााादुर थापा बाजुरा-१, प्रेमवहादुर आले डोटी-२, गणेशसिंह ठकुन्ना दार्चुला से निर्वाचित हैं। इसी प्रकार एमाओवादी के उमेशकुमार यादव सप्तरी-३, श्यामकुमार श्रेष्ठ रामेछाप-२, प्रभु शाह रौतहट-३, सत्यनारायण भगत रौतहट-४, शक्ति बस्नेत जाजरकोट-१, सन्तकुमार थारु बर्दिया-३, मानबहादुर थारु बर्दिया-४ भी ४५ से कम उमर के हैं।
इसी तरह सबसे बुजर्ुग सभासदों में तर्राई मधेश सद्भावना पार्टर्ीीे अध्यक्ष तथा र्सलाही क्षेत्र नं. ४ से निर्वाचित महेन्द्रराय यादव हैं। उन की उमर ७६ वर्षहै। बांके क्षेत्र नं. ३ और चितवन क्षेत्र नं. ४ से निर्वाचित नेपाली कांग्रेस के सभापति सुशील कोइराला ने ७४ बसन्त देखे हैं तो मजदूर किसान पार्टर्ीीे अध्यक्ष नारायणमान बिजुक्छे ने भी ७३ शरद पार कर लिया है। विजुक्छे भक्तपुर क्षेत्र नं. १ से निर्वाचित हैं।

