जबरा ने स्वीकार किया कि रञ्जन कोइराला की सजा घटाने के फैसले के कारण महाअभियोग लगा

काठमांडू, ४सितंबर । निलम्बित प्रधानन्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर जबरा ने रञ्जन कोइराला की सजा को घटाने के फैसले के कारण महाअभियोग लगाया गया, स्वीकार किया है ।
कानून द्वारा दिए गए अधिकार के अनुुसार विवेक प्रयोग करते हुए महाअभियोग सिफारिस समिति में उन्होंने कहा है कि ‘इस आधार से महाअभियोग लगेगा ये सोचकर गिल्टी नहीं महसूस करता हूँ ।
सशस्त्र प्रहरी के तत्कालीन डीआईजी कोइराला ने २०७८ माघ में अपनी पत्नी गीता की हत्या की थी । महारागजञ्ज में हत्या हुई गिता के शव को पालुङ में जाकर जला दिया गया था । शव फेंके हुए स्थान में पहुँचने के क्रम में कोइराला २८ माघ को पकड़ा गया था ।
जिला अदालत, काठमांडू ने रञ्जन को दोषी करार करते हुए २० वर्ष कैद की सजा सुनाते हुए तत्कालीन पुनरावेदन अदालत, पाटन में उसे सदर किया । लेकिन तत्कालीन प्रधानन्यायाधीश जबरा और न्यायाधीश तेजबहादुर केसी के इजलास ने १५ असार २०७८ में रञ्जन को कैद की सजा मात्र साढे ८ वर्ष कर दिया । सावन ८ गते को रञ्जन जेल से छुट गया ।
रविवार को महाअभियोग सिफारिस समिति में बयान देने के लिए आज तीसरे दिन भी जबरा को उपस्थित होना पड़ा । जबरा से सजा को घटाने के साथ और भी विषय को लेकर पुछताछ की गई है ।

