काठमांडू में विश्व हिन्दी दिवस
विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर भारतीय राजदूतावास एवं नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान काठमांडू से हिन्दी भाषा में प्रकाशित दो मासिक पत्रिकाएं ‘हिमालिनी’ और ‘द पब्लिक’ के संयुक्त आयोजन में एक कार्यक्रम १४ जनवरी शिक्रवार को सम्पन्न हुआ, जिसके प्रमुख अतिथि पूर्व प्रधानमन्त्री लोकेन्द्रबहादुर चन्द, विशिष्ट अतिथि गंगाप्रसाद उप्रेती एवं नेपाल में भारत के राजदूत महामहिम रंजित रे थे । मंचासीन अतिथियों द्वारा संयुक्त रुप में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ । दो लगातार सत्रों में विभाजित इस कार्यक्रम का प्रथम सत्र उद्घाटन समारोह था, जिस में मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथिजनों द्वारा नेपाल में हिन्दी की सार्थकता, सान्दर्भमिकता एवं उपादेयता पर विचार व्यक्त किए गए । इस अवसर पर प्रथम सचिव अभय कुमार ने भारत के प्रधानमन्त्री मनमाहेन सिंह का संदेश पढ़कर सुनाया ।

इस सत्र में दोनों ही पत्रिकाओं के हिन्दी दिवस पर विशेषांकों का विमोचन किया गया । इनका प्रतिनिधित्व करते हुए ‘हिमालिनी’ के संस्थापक सच्चिदानन्द मिश्र और ‘द पब्लिक’ की संस्थापक एवं प्रकाशक वीणा सिन्हा ने भी मंतव्य प्रकट किए । इस सत्र में स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग की प्राध्यापक डा श्वेता दीप्ति द्वारा रचित कविता संग्रह ‘अनुभूतियों के विखरे पल’ का विमोचन प्रमुख अतिथि पूर्व प्रधानमन्त्री लोकेन्द्रबहादुर चन्द, विशिष्ट अतिथि गंगाप्रसाद उप्रेती एवं नेपाल में भारत के राजदूत महामहिम रंजित रे ने किया।
इसी सत्र में दो कार्यपत्र क्रमशः डा उषा ठाकुर और कुमार सच्चिदानन्द सिंह ने प्रस्तुत किया । जिनके विषय थे ‘नेपाल और भारत के बीच साहित्यिक–सांस्कृतिक सेतु के रुप’ और ‘नेपाल में हिन्दी का योगदान’ थे । और नेपाल में हिन्दी अतीत, वर्तमान और संभावनाएं, जिन पर क्रमशः डा मृदुला शर्मा और डा श्वेता दीप्ति ने टिप्पणीयां की । इस सत्र में भारत से आए हुए डा बालेन्दु शर्मा दधीच ने एक कम्प्युटर कार्यशाला के द्वारा देवनागरी लिपि या स्थानीय भाषाओं में कम्प्युटर प्रयोग की सहजता को रोमांचक ढंग से प्रस्तुत किया । द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलनका आयोजन किया गया । जिसमें गोपाल अश्क, बूँद राना, वीणा सिन्हा, करुणा झा, कैलाश दास, रत्नेश्वर झा, मुकुन्द आचार्य, श्वेता दीप्ति, सहित तीस कवि–कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया । सम्पूर्ण कार्यक्रम का संयोजन भारतीय राजदूतावास के अटैची डा मोहनचन्द्र बहुगुणा ने किया, जबकि सफल संचालन कंचना झा के द्वारा हुआ ।



