आज कालरात्रि की पूजा, हम भगवती के नौ रुप की पूजा करते हैं
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहरिणी ।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तुते ।।
काठमांडू, २ अक्टूबर । नवरत्रि नौ देवी की पूजा आराधना । हम भगवती के नौ रुप की पूजा करते हैं । भगवती आज जिस रुप को धारण करती हैं वो है कालरात्रि । और आज का दिन यानी कि सातवां पूजा जिसे हम सप्तमी कहते हैं अति विशिष्ट माना जाता है क्योंकि आज से देवी माँ का दरवाजा खुल जाता है और सभी भक्त पूजा स्थलों पर माता के दर्शन के लिए जुटने लगते हैं ।
ये भगवती की असीम कृपा ही है कि जो लोग इनकी पूजा अर्चना श्रद्धा और भक्ति भाव से पूर्ण होकर करते हैं माँ उन्हें कभी निराश नहीं करती हैं । वैसे तो सभी अपनी ईच्छानुसार इस त्योहार को मनाते हैं । कोई पूरे नवरात्रा करते हैं तो कोई पहला, चौथा और अष्टमी का व्रत लेते हैं । लेकिन माँ को कोई शिकायत नहीं कोई उनका व्रत करें न करें , पूजा करें न करें वो अपने बच्चों से कभी नाराज नहीं होती ।
आज नवरात्रि का सांतव दिन और आज माता के कालरात्रि रुप की पूजा अर्चना की जाती है । माता का रुप अति भयावह होता है । कहते हैं सम्पूर्ण सृष्टि में इस रुप से अधिक भयावह दूसरा कोई रुप नहीं है । माता का यह रुप मातृत्व को समर्पित है । माता का रुप काला है और ये तीन नेत्रधारी हैं । गले में विद्युत की माला धारण करती हैं । हाथ में खड्ग और कांटा है । ये भक्तों का हमेशा कल्याण करती हैं । इनका रुप जो विकराल है वो केवल और केवल अपने शत्रुओं के लिए है ।
कालरात्रि ये माँ दुर्गा का रौद्र रुप है । कालरात्रि अर्थ है काल या समय और रात्रि का अर्थ रात । कहते हैं माँ पार्वती ने शुंभ और निशुंभ को मारने के लिए यह अवतार दिया था । लेकिन जहाँ तक बात अपने भक्तों की है तो अपने भक्तों पर तो माँ सदैव स्नेह की वर्षा करती रहती हैं । जय माता रानी ।

