दहेज पीडितों को आर्थिक सहयोग
दिनेश शर्मा:सप्तरीके दिघवा २ से सदरमुकाम र ाजविराज आई करीब ४० बषर्ीया निरसी देवी खंग लगातार रोये जा रही थी। पाँच बर्षपहले जब उसके पति का निधन हुआ, उसी समय से वह हँसना भूल गई। उसकी आँखों में आँसु तथा चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। बेचारी दिल खोल कर हँस भी नहीं पा र ही थी। पति की याद और चार बेटियों का पालन-पोषण की जिम्मेवारी का दर्द निरसी को कभी हँसने का मौका नहीं देता।
बेटियों की खुशियों में ही अपनी खुशी तलाशते हुए वो अपना दुःख भी किसी को सुना नहीं पाती थी। वो बोली – ‘खुशी तो दूर की बात है, आज तक मैंने अपना दुःख भुलाने के लिए रोने तक का भी मौका नहीं पाया। लेकिन, दहेजविरुद्ध अभियान का संचालन करते आ र ही संस्था ‘दहेजमुक्त मिथिला’ ने राजविराज में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें निरसी देवी खंग दहाडÞे मार कर तो नहीं र ो सकी परन्तु अपने मन की पीडÞा को उसने वहां इस प्रकार अभिव्यक्त किया। ‘पति की मृत्यु के बाद चार-चार बेटियों का पालन-पोषण से लेकर पढर्Þाई लिखाई की जिम्मेवारी भी मेरे ऊपर थी। लेकिन, मैं तो खुद मजदूरी करके अपना पेट किसी तरह पाल रही हूं, मैं इन लोगों को कहाँ से पढÞाती’, ऐसा उसका कहना था।
सामाजिक परिवेश के कारण एक अकेली महिला का बचना ही लोहे के चने चवाने जैसा है। घर-परिवारवालों ने भी कोई खोज खबर नहीं की। मायके पक्ष से भी कोई सहयोग नहीं मिला, ऐसा उस दुखियारी का कहना है। एकल महिला के लिए राज्य द्वारा उपलब्ध सामाजिक सुरक्षा भत्ता भी अभीतक प्राप्त नहीं हर्ुइ है। सरकार द्वारा दी जानेवाली कोई भी सुविधा इस महिला को प्राप्त नहीं हर्ुइ है। निरसी ही नहीं, नेपाल परिवार नियोजन संघ, सप्तरी के सहयोग में आयोजित उक्त कार्यक्रम में हिंसा में पडÞी, दहेज के कार ण पीडिÞत तथा विभिन्न कारणों से कष्टपर्ूण्ा दिनेश शर्मा @ दहेज पीडितों को आर्थिक सहयोग जीवन व्यतीत कर रही दर्जनों महिलाओं ने अपनी अपनी पीडÞा, एक दूसरे को सुनाकर मन को हल्का किया।
उन लोगो में अधिकांश ने बताया कि मादक पादर्थ सेवन कर पतिद्वार ा मारपीट करना और सौतन घर में लाने से अपने बच्चों को पालने में कठिनाई हो रही है। आर्थिक तंगी के कारण बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय दिख रहा है, ऐसा कहते हुए उनकी आँखों में आँसु डबडबा आए। कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए, आयोजक संस्था की अध्यक्ष करुणा झा ने बताया कि संर्घष्ा ही जीवन है। पुरुषवादी चिन्तन तथा पुरातनवादी सोच के कार ण अधिकांश महिला लैंगिक विभेदता के शिकार हैं।
झा ने आगे बताया – ये लोग अपनी समस्या नहीं तो किसी को बता सकती हैं, और नहीं प्रतिकार करने की हिम्मत कर सकती हैं। दहेज के कारण प्रताडिÞत, र्डाईन के आर ोप में गंदा घोल के पिलाना, महिला होने के कारण ये सब स्वाभाविक रूप से होना तथा अपने मन की पीडÞा को मन ही में दबा के र हना महिलाओं में आम बात है। दूसरे दर्जे के नागरिक की तरह जीवन बिता रही महिलाओं की आवाज घर की चारदीवारी के बाहर नहीं जा पा रही। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगारी, तथा अवसर से हमेशा पीछे रही महिलाओं को दासी के रूप में दिनरात घर में पीसना पडÞता है। इसका अन्त करने के लिए सभी पक्षों द्वारा पहल करने की आवश्यकता है, उस कार्यक्रम में ऐसा बताया गया। नेपाल परिवार नियोजन संघ के शाखा पब्र न्धक लक्ष्मण पाडै ले न े कायर्त्र mम म ंे ५ हिसं ा पीडितÞ महिलाआ ंे का े आथिर्क सहयागे दते े हएु कहा कि इस े समस्या समाधान क े रूप म ंे न ल।ंे जिला म ंे सघं षर्प ण्ू ार् जीवन विता रही एसे ी बहतु सी महिलाए ं ह।ंै सबका े सहयागे की आवश्यकता ह।ै हमलागे ा ंे न े इसकी शरुु आत मात्र की ह।ै कायर्त्र mम म ंे एकल महिला सप्तर ी की अध्यक्ष अनीता देवकोटा, दहेजमुक्त मिथिला की महासचिव साधना झा ने भी मन्तव्य दिया। J

