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मालीवारा में महाकाली पूजनोत्सव : अजय कुमार झा

 

जलेश्वर, अजय कुमार झा। आज कार्तिक 15 गत्ते सोमबार के दिन नेपाल के मधेश प्रदेश (प्रदेस नंबर 2) की राजधानी जनकपुर से 18 किलोमीटर दक्षिण भारत के सीतामढ़ी (भिठामोड़) बोर्डर से सटे जलेश्वर नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 के मलिबारा में महाकाली पूजनोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस क्रम में आज कलश यात्रा के तहत हजारों की संख्या में बालबालिकाएं सजधज के सर पे गगरी लिए शुवह से ही निराहार रहकर सहर्ष- उमंग के साथ माता कालिका के पूजन हेतु समर्पित दिख रही थी। प्रदेश प्रमुख श्री हरिशंकर मिश्रा के अध्यक्षता में
संपन्न इस कलश यात्रा तथा महाकाली पूजनोत्सव समारोह में श्री रामचंद्र तिवारी जी, नगर प्रमुख श्री सुरेश सोनार जी, श्री ईश्वरनारायण पाण्डे जी, श्री बजरंग नेपाली जी, श्रीमती रानी शर्मा लगायत पूर्व वार्ड अध्यक्ष श्री संजय पण्डे के साथ महाकाली पूजनोत्सव समिति के अध्यक्ष दिवाकर पांडे, रूपेश पांडे, सुजल पांडे, सुशिल राय,रंजय मंडल,सुमन पांडे,शुभम पांडे,पंकज पांडे, चिंटू मंडल, गणित मंडल, श्रवण मंडल, अमर मंडल लगायत के युवाओं के ऊर्जा और उत्साह का परिणाम है की पिछले 28 वर्षों से यह धार्मिक अनुष्ठान निर्बाध रूप में होता आ रहा है। नेपाल भारत के हजारों काली भक्तो का संगम इस उत्सव में देखा जा सकता है। भारत के मशहूर कलाकारों के द्वारा जागरण तथा भक्तो द्वारा पाठ का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है। मैं खुद पिछले तेरह वर्षों से यह कार्यक्रम देखते आ रहा हूँ। सबसे विशेष बात है कि लाखों में खर्चा का जिम्मा यहाँ के युवाओं के कन्धा पर ही रहता है। उसमे भी वर्तमान अध्यक्ष श्री दिवाकर पांडे के ऊपर। आजके युग में युवाओं में धर्म के प्रति दिखता यह भाव वास्तव में अनुकरणीय है।
काली पूजन के सम्बन्ध में एक घटना का बिबरण आता है, एक बार दारुक नाम के असुर ने ब्रह्मा को प्रसन्न किया। उनके द्वारा दिए गए वरदान से वह देवों और ब्राह्मणों को प्रलय की अग्नि के समान दुःख देने लगा। उसने सभी धर्मिक अनुष्ठान बंद करा दिए और स्वर्गलोक में अपना राज्य स्थापित कर लिया। सभी देवता, ब्रह्मा और विष्णु के धाम पहुंचे। ब्रह्मा जी ने बताया की यह दुष्ट केवल स्त्री दवारा मारा जायेगा। तब ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देव स्त्री रूप धर दुष्ट दारुक से लड़ने गए. परतु वह दैत्य अत्यंत बलशाली था, उसने उन सभी को परास्त कर भगा दिया।
ब्रह्मा, विष्णु समेत सभी देव भगवान शिव के धाम कैलाश पर्वत पहुंचे तथा उन्हें दैत्य दारुक के विषय में बताया। भगवान शिव ने उनकी बात सुन मां पार्वती की ओर देखा और कहा हे कल्याणी जगत के हित के लिए और दुष्ट दारुक के वध के लिए में तुमसे प्रार्थना करता हुं। यह सुन मां पार्वती मुस्कराई और अपने एक अंश को भगवान शिव में प्रवेश कराया। जिसे मां भगवती के माया से इन्द्र आदि देवता और ब्रह्मा नहीं देख पाए उन्होंने देवी को शिव के पास बैठे देखा।
मां भगवती का वह अंश भगवान शिव के शरीर में प्रवेश कर उनके कंठ में स्थित विष से अपना आकार धारण करने लगा। विष के प्रभाव से वह काले वर्ण में परिवर्तित हुआ। भगवान शिव ने उस अंश को अपने भीतर महसूस कर अपना तीसरा नेत्र खोला। उनके नेत्र द्वारा भयंकर-विकराल रूपी काले वर्ण वाली मां काली उत्तपन हुई। मां काली के लालट में तीसरा नेत्र और चन्द्र रेखा थी। कंठ में कराल विष का चिन्ह था और हाथ में त्रिशूल व नाना प्रकार के आभूषण व वस्त्रों से वह सुशोभित थी। मां काली के भयंकर व विशाल रूप को देख देवता व सिद्ध लोग भागने लगे।
मां काली के केवल हुंकार मात्र से दारुक समेत, सभी असुर सेना जल कर भस्म हो गई। मां के क्रोध की ज्वाला से सम्पूर्ण लोक जलने लगा। उनके क्रोध से संसार को जलते देख भगवान शिव ने एक बालक का रूप धारण किया। शिव श्मशान में पहुंचे और वहां लेट कर रोने लगे। जब मां काली ने शिवरूपी उस बालक को देखा तो वह उनके उस रूप से मोहित हो गई। वात्सल्य भाव से उन्होंने शिव को अपने हृदय से लगा लिया तथा अपने स्तनों से उन्हें दूध पिलाने लगी। भगवान शिव ने दूध के साथ ही उनके क्रोध का भी पान कर लिया। उनके उस क्रोध से आठ मूर्ति हुई जो क्षेत्रपाल कहलाई।
10 महाविद्याओं में से एक मां काली के 4 रूप हैं:- दक्षिणा काली, शमशान काली, मातृ काली और महाकाली। हालांकि मां कालिका की साधना के कई रूप हैं लेकिन भक्तों को केवल सात्विक भक्ति ही करना चाहिए। शमशान काली, काम कला काली, गुह्य काली, अष्ट काली, दक्षिण काली, सिद्ध काली, भद्र काली आदि कई मान से मां की साधना होती है।

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महाकाली को खुश करने के लिए उनकी फोटो या प्रतिमा के साथ महाकाली के मंत्रों का जाप भी किया जाता है। इस पूजा में महाकाली यंत्र का प्रयोग भी किया जाता है। इसी के साथ चढ़ावे आदि की मदद से भी मां को खुश करने की कोशिश की जाती है। अगर पूरी श्रद्धा से मां की उपासना की जाए तो आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। अगर मां प्रसन्न हो जाती हैं तो मां के आशीर्वाद से आपका जीवन पलट सकता है, भाग्य खुल सकता है और आप फर्श से अर्श पर पहुंच सकते हो।
* ऐसी बीमारियां जिनका इलाज संभव नहीं है, वह भी काली की पूजा से समाप्त हो जाती हैं।
* काली के पूजक पर काले जादू, टोने-टोटकों का प्रभाव नहीं पड़ता।
* हर तरह की बुरी आत्माओं से माता काली रक्षा करती हैं।
* कर्ज से छुटकारा दिलाती हैं।
* बिजनेस आदि में आ रही परेशानियों को दूर करती हैं।
* जीवनसाथी या किसी खास मित्र से संबंधों में आ रहे तनाव को दूर करती हैं।
* बेरोजगारी, करियर या शिक्षा में असफलता को दूर करती हैं।
* कारोबार में लाभ और नौकरी में प्रमोशन दिलाती हैं।
* हर रोज कोई न कोई नई मुसीबत खड़ी होती हो तो काली इस तरह की घटनाएं भी रोक देती हैं।
* शनि-राहु की महादशा या अंतरदशा, शनि की साढ़े साती, शनि का ढइया आदि सभी से काली रक्षा करती हैं।
*पितृदोष और कालसर्प दोष जैसे दोषों को दूर करती हैं।
आवश्यकता है कि इस पूजन को सृजनात्मक और उपलब्धिमूलक बनाने का प्रयास किया जाय। युवाओं में साधना तथा मन्त्र शक्ति का प्रादुर्भाव हो। यह क्षेत्र शारीरिक बौद्धिक तथा वैभवीय दृष्टि से सबल बने। युवाओं में जीवन के प्रति प्रेम और विश्व समाज के प्रति उत्तरदायित्व का वोध बढे। सामाजिक मेलमिलाप के साथसाथ सम्मान और सहयोग के भाव में बृद्धि हो। जय माँ काली! जय माँ जगदम्बा!! जय माँ सरश्वती!!!

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