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राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा नागरिकता विधेयक पर सर्वोच्य अदालत को लिखित जवाब

 

काठमांडू,१ मंसिर–

काठमांडू,१ मंसिर– नागरिकता विधेयक को प्रमाणीकरण नहीं करने के लिए राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के खिलाफ सर्वोच्य में दायर रिट में अदालत द्वारा जारी कारण बताओं आदेश का राष्ट्रपति कार्यालय ने लिखित जवाब दिया है । राष्ट्रपति कार्यालय के सचिव यादव प्रसाद कोइराला के द्वारा न्यायालय को सौंपे गए जवाब में उल्लेख किया गया है कि संसद में धारा १० (२)े के अनुच्छेद १५ की अनिवार्य शर्तो की तरफ संसद का ध्यान नहीं गया इसलिए राष्ट्रपति संस्था द्वारा विधेयक को मान्य करना आवश्यक नहीं समझा गया ।
राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए १२ पन्नों के जवाब में कहा गया है कि संविधान का पालन और उसकी रक्षा करना राष्ट्रपति का मुख्य कत्र्तव्य है । विधेयक को सुझावों के साथ संंसद को वापस भेजा गया जिसे संसद द्वारा नजर अंदाज किया गया । यदि संबंधित निकाय द्वारा संविधान और प्रचलित कानूनों का पालन नहीं किया जाता है तो राष्ट्रपति संस्था अभिभावक की भूमिका का निर्वाह करते हुए संविधान और कानून का पालन करते हुए सुझाव के साथ प्रतिनिधि सभा में वापस किया गया ।
असोज ६ गते सर्वोच्च अदालत में रिट निवेदन किया गया था । विधेयक प्रमाणीकरण के लिए परमादेश देने की मांग करते हुए अधिवक्ता सुनीलरञ्जन सिंह के साथ ही ५ और भी दूसरी तरह के रिट दर्ता किया गया था । उक्त रिट के उपर असोज ९ गते सुनुवाई करते हुए न्यायाधीश हरिप्रसाद फुयाँल के एकल इजलास ने राष्ट्रपति कार्यालय को कारण दिखाओं आदेश जारी किया था ।

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