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मतदान अपेक्षाकृत कम क्यों ?

 

काठमांडू, ४ मंसिर –

प्रतिनिधि सभा और प्रदेश सभा सदस्य के लिए होने वाले निर्वाचन पर कुछ दिनों से लोग नजरें टिकाएं बैठे थे । आज मतदान हो गया और कहने के लिए शांतिपूर्ण मतदान हुआ है । वैसे कुछ जगहों पर छिटपुट झड़पें भी हुई हैं । कहीं कहीं गोलियां भी चली , कुछ लोग घायल भी हुए । आज शाम जब मतदान सम्पन्न हुआ तो निर्वाचन आयोग ने पत्रकार सम्मेलन कर यह जानकारी दी कि मतदान शांतिपूर्ण ढ़ंग से समाप्त हुआ है ।
प्रतिनिधि सभा और प्रदेश सभा निर्वाचन में करिब ६१ प्रतिशत मतदान हुआ है । रविवार को सम्पन्न हुए निर्वाचन में आयोग ने कहा कि जितनी अपेक्षा की गई थी उतना मतदान नहीं हुआ है और १५ जगहों पर मतदान स्थगित भी हुआ है । ४४ मतदान केन्द्रों पर विवाद और झड़पें हुई हैं । सुरक्षित मतदान करवाने के लिए सुरक्षाकर्मी को ३५ राउण्ड गोलियां भी चलानी पड़ी हैं ।
प्रमुख निर्वाचन आयुक्त दिनेश थपिलया ने पत्रकार सम्मेलन करते हुए कहा कि हमने जितना सोचा था उसके अपेक्षा मतदान थोड़ा कम हुआ है । कुछ सामान्य घटना के बाहेक शान्तिपूर्ण रुप में मतदान सम्पन्न हुआ है । २०७४ साल के प्रतिनिधि सभा की ओर से ६७.६३ प्रतिशत मतदान हुआ था ।
छः महिना पहले हुए स्थानीय तह के निर्वाचन में ६६.८६ प्रतिशत मतदाता ने मतदान किया था । उस समय देश भर से १ करोड १८ लाख ५६ हजार मत गिराया गया था । स्थानीय तह निर्वाचन में प्रदेश १ में ६५.३५ प्रतिशत, मधेस में ६७.६९ प्रतिशत, बाग्मती में ६४.१६ प्रतिशत, गण्डकी में ६८.२८ प्रतिशत, लुम्बिनी में ६६.७९ प्रतिशत, कर्णाली में ७० प्रतिशत और सुदूर पश्चिम में ६५.८० प्रतिशत मतदान हुआ था ।
कहने का तात्पर्य यह है कि जनता सच में इसबार ऊब गई है इन नेताओं और उनकी झूठे वादों से । वह बदलाव चाहती है,और नए चेहरे की तलाश में है लेकिन जब वही चेहरे नजर आए तो बहुत से लोगों ने मतदान नहीं करने का निर्णय किया होगा । साथ ही इसबार मतदाता शिक्षा को लेकर बहुत से सवाल उठाए जा रहें हैं । इसबार मतदाता शिक्षा के नाम पर भले ही खर्चा किया गया हो लेकिन गाँव घर के लोगों तक नहीं पहुँचा है जिसके कारण बहुत से लोग अच्छी तरह से समझ नहीं पाए कि कैसे मतदान किया जाए ? असमंजस की अवस्था थी । अभी जो ६१ प्रतिशत की बात हो रही है जब मत बदर होंगे तो क्या होगा ? ये सोचने की बात है ।
मतदान कम होने का एक और भी कारण है कि लगभग ५० लाख मतदाता तो देश से बाहर है और सिर्फ मतदान के लिए नहीं आ सकते हैं । ये तो हुई देश से बाहर की बात । बहुत तो देश में रहकर भी अपने क्षेत्र तक नहीं गए । काम में व्यस्तता के कारण वो नहीं जा पाए और कुछ नई तकनीकी का प्रयोग तो होेने से रहा । हर कोई चाहता है कि अपने अधिकार का प्रयोग करें वो जहाँ रहें वहाँ से अपना मतदान दें लेकिन इस तरह की प्रक्रिया की शुरुआत न जाने कब होगी ? अगर इन समस्याओं पर सभी का ध्यान जाए तो कुछ अलग हो निर्वाचन में ।

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