कौन बनेगा राष्ट्रपति ? होड़ राष्ट्रपति बनने की : कंचना झा

कंचना झा, काठमांडू, २७ मंसिर । बड़ी अजीब चीज है ये राजनीति । एक पद के लिए नेता अपना सबकुछ दांव पर लगा देता है । कभी दल बदलु भी हो जाता है । एक उम्र का सफर तय करता है एक पार्टी से । बार–बार पद प्राप्त करता है एक पार्टी से और जब एकबार उसकी बात नहीं मानी जाती है तो चला जाता है दूसरी पार्टी में ताकि एकबार फिर सांसद बन सके या पद प्राप्त कर सके जिसकी उसे आकांक्षा है ।
जब भी राजनीति की बात चलती है । दल बदल की बातें होती है तो एक चुटकुला याद आता है । एक नेता से किसी से पुछा कि– आपकी पार्टी को छोड़कर जब कोई नेता दूसरी पार्टी में चला जाता है तो आप उसे क्या कहेंगे ?
नेता का जबाब आता है – देश द्रोही
और अगर कोई नेता दूसरी पार्टी को छोड़कर आपकी पार्टी में आए तो आप क्या कहेंगे ?
नेता का जबाब आता है– हृदय परिवर्तन ।
तो ये राजनीति है । यहाँ कभी भी, कुछ भी हो सकता है । अभी सरकार बनाने की होड़ है । प्रधानमंत्री कौन बेनेगा ?मुख्यमंत्री कौन बनेगा ? और कौन बनेगा राष्ट्रपति ? अभी चर्चा का विषय है । हाँ एक और बात चर्चा की विषय है वह है – मुलुकी फौजदारी संहिता संशोधन करने के लिए अध्यादेश लाने का जो निर्णय किया गया है । इसपर भी अभी बहुत जोर शोर से बहस चल रही है । खासकर कांग्रेस की अगर बात करें तो यहाँ बहुत से नेताओ के अंदर आक्रोश है । कुछ को समानुपातिक में जगह नहीं मिली उससे,किसी को चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं मिला इससे । अब जिनको जो नहीं मिला वो दौड़ रहें हैं किसी और पद के लिए । चुनाव के नतीजे जब आ गए तब बहुत से नेताओं ने खुलकर कहा कि हम भी जबान हैं । हम भी प्रधानमंत्री बन सकते हैं लेकिन शायद दाल नहीं गली तो अब जब प्रधानमंत्री बनने के लिए दाल नहीं गली तो विकल्प में राष्ट्रपति पद तो है न । अब देखें कौन सी पद को पाने के लिए कौन किसका समर्थन कर सकते हैं तो सबसे पहला नाम है– नेता रामचन्द्र पौडेल का । इनकी प्रबल ईच्छा थी कि ये प्रधानमंत्री बने । सूत्रों के अनुसार अब कहते हैं कि यदि इन्हें राष्ट्रपति बना दिया जाए तो ये प्रधानमंत्री पद के लिए देउवा को समर्थन देने के लिए तैयार हैं । प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रुप में गगन थापा को भी देखा जा रहा है । लेकिन ऐसा लगता नहीं कि वो प्रधानमंत्री बनेंगे । उनके लिए तो वृद्ध लोग सोचते होंगे कि पहले एक दो बार हम बन जाते हैं तुम्हारे लिए तो बेटा बहुत समय है । ये है राजनीति जहाँ समझदार, अच्छे वक्ता, युवा की जरुरत नहीं है । यहाँ जरुरत है एक ऐसे प्रधानमंत्री की जो या तो खुब डिंग हांकना जानता हो या फिर चुप रहना जानता हो ।
कांग्रेस के ही कुछ नेताओं के अनुसार प्रधानमन्त्री पद के आकांक्षी देउवा और थापा के आलावे अन्य नेता भी शीतल निवास प्रवेश के लिए सम्झौता करने को तैयार हैं ।
गठबन्धन में आबद्ध दल को मनाकर अपने नेतृत्व में सरकार और कांग्रेस से ही राष्ट्रपति बनाने की देउवा की योजना है । ये तो हुई कांग्रेस की बात । ये चर्चा केवल कांग्रेस में नहीं है ।
राष्ट्रपति बनने की ईच्छा माओवादी में भी देखी जा रही है । सूत्रों के अनुसार माओवादी ने राष्ट्रपति की जिम्मेदारी लेने की ईच्छा उपराष्ट्रपति नन्दबहादुर पुन तथा पूर्वसभामुखद्वय अग्नि सापकोटा और कृष्णबहादुर महरा ने पार्टी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल के समक्ष पेश किया है ।
सत्ता गठबन्धन में ही रहने वाले एकीकृत समाजवादी के अध्यक्ष माधवकुमार नेपाल और सम्मानित नेता झलनाथ खनाल भी राष्ट्रपति पद के लिए चर्चा में हैं ।
प्रतिनिधिसभा निर्वाचन में समानुपातिक की ओर से तीन प्रतिशत मत नहीं पहुँचे के बाद एकीकृत समाजवादी राष्ट्रीय दल नहीं बन पाई है जिसके कारण नेपाल पर बहुत ज्यादा दबाब है । १० सीट में सीमित होने के कारण एकीकृत समाजवादी की राजनीतिक दाबी कमजोर हो चुकी है । प्रतिनिधिसभा निर्वाचन में पराजित पार्टी राजनीति में सीमित पूर्वप्रधानमन्त्री खनाल न भीे अपनी राष्ट्रपति बनने की इच्छा को व्यक्त किया है । एक तरह से कहें तो एक दंगल है ये राजनीति जहाँ सबकुछ जायज है । देंखे अब कौन बनते हैं राष्ट्रपति । वैसे कांग्रेस गठबंधन सरकार बनना लगभग तय है तो लेकिन राष्ट्रपति कौन बनेंगे या किस पार्टी से बनेंगे ? अभी नहीं कहा जा सकता है ।

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