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चिन मे उठी अवाज, ‘राष्ट्रपति सत्ता छोडो’ : अनिल तिवारी

 

कठिन डगर पर सिजिपिग का तीसरा कार्यकाल,

अनिल तिवारी, बीरगंज । स्वभावत: “माओ” और “सी” के समय के बीच चिनी समाज मे बहुत सारी परिवर्तन आई है लेकिन चीनी नागरिकों के लिए ” स्वतंत्र व्यक्तित्व और सूचना का अधिकार” चिन से चांद तक की दुरी जैसी ही है, जबकि  चीन मे संसार के सबसे ज्यादा सामाजिक सञ्जाल चलाने वाले लोग है। कोभिड की शुरुआत मे चीन के सरकारी संयंत्र द्धारा सार्वजनिक की गई कई बातें सत्ययता से दुर था और कृतध्नता का कितना शिकार हुए पहले के घटनाओं से साबित होता है ।

चीन के कितने भूभाग मे तो जनजीवन अभी भी दयनीय है ? खास करके अल्पसंख्यक समुदाय के लोग जो अपना देश छोडकर विदेश पलायन होने को मजबूर हुए है, उन लोगों को सिर उठाने या प्रदर्शन करने पर करेन्ट लगाने वाला दन्ड से दन्डित होना पडता है ।

’द प्रिन्स’ के छैठों अंक मे उइगर समुदाय के एक निर्वासित शिक्षक की हृदयविदारक कथा समावेश कि गयी है। जिसमे चीनके सिन्जियाङ प्रान्त मे रहनेवाले  उन समुदाय के दस लाख से भी ज्यादा लोगो को पुनर्शिक्षा क्याम्प कहलाने वाली जेल की तरह की संरचना मे बन्दी बनाया गया है। वे लोग दासवत् जिवन बिताने के लिए बाध्य है ।

चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (सिसिपि) के २०वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान तीसरे कार्यकाल के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ताजपोशी धूमधामके साथ हुइ है लेकिन उनकी जीरो–कोविड रणनीति को खत्म करने के लिए लोगों का बढ़ता प्रदर्शन और यहां तक की उनको सत्ता से बाहर करने की मांग पूरी तरह विरोधाभासी हैं । जिस वक़्त शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति के पद पर अपने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत की है, उस समय उनके सामने एक बार फिर महामारी उग्र हो गई है । इसकी वजह से कई शहरों में लांकडाउन लगाना पड़ा है । इससे लोगों में नाराजगी है जिसके कारण पूरे देश की अलग–अलग यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन हो रहे है ।

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ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस रिपोर्ट :–आसान नहीं कारोना की डगर। एक ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार यदि चिन सरकार सारे प्रतिबंध हटाकर सब कुछ खोल दिया  तो ३सय ६३ मिलियन लोग संक्रमित हो जाएंगे, जिसमें से ५ दशमलव ८मिलियन लोगों को आईसीयू में दाखिल करना होगा जो लगभग ६लाख २०हजार लोगों की मौत होने की आशंका है । अत: रिपोर्ट के अनुसार चीन अपनी जीरो–कोविड नीति से धीरे–धीरे बाहर निकलेगा और संभवत: इसे २०२३के आगे भी जारी रख सकता है ।

इस रिपोर्ट में अमेरिका और यूरोप के अनुभव और डेटा को आधार बनाकर अनुमान लगाया गया है, जहां एक पूर्ण विकसित ओमिक्रांन प्रकोप की वजह से एक चौथाई लोग संक्रमित हो गए थे । फिलहाल, चीनी अधिकारी कोविड संक्रमणों को लेकर अपनी शून्य–सहिष्णुता नीति पर ही चलनेको लेकर दृढ़ता दिखाई दे रहे हैं । हालांकि इसमें कुछ बदलाव किए गए हैं । मसलन व्यापक लांकडाउन और बार–बार बड़े पैमाने पर परीक्षण जैसे कठिन उपायों को आसान बनाया गया है ।

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ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन को अपने वैक्सीन बूस्टर डोज देने के अभियान को तेज करने जरूरत है, क्योंकि वह बुजुर्गों के लिए पर्याप्त टीकाकरण कवरेज की कमी की समस्या का सामना कर रहा है ।

शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाली पोलिट ब्यूरो स्थायी समिति ने कहा है कि उन्हें सर्दियों में संक्रमण की एक बड़ी लहर आने की उम्मीद है । ऐसे में उसे २०२३ के वसंत तक कड़े उपायों के बने रहने की उम्मीद दिखाई दे रही है ।

कोविड से जूझ रही सरकार अब चीनी अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में संघर्ष का सामना कर रही हैं । नवंबर में संघर्षरत रियल एस्टेट कारोबारियों की सहायता करने के लिए १६ सूत्रीय पैकेज की घोषणा की गई थी । अब सरकारी बैंकों ने संयुक्त रूप से प्रांपर्टी सेक्टर को ३० दशमलव ७ बिलियन अमेरिकी डालर का कर्ज देने के लिए आपस में हाथ मिलाया है, ताकि इस क्षेत्र के सामने खड़े वित्तीय संकट से निपटा जा सके । लेकिन यह सारे उपाय उस वक्त तक काम नहीं करेंगे, जब तक बाजार को दोबारा खोलने को लेकर उत्साहपूर्ण माहौल नहीं बनता और अर्थव्यवस्था को चला रही नीति की दिशा को लेकर लोग आश्वस्त नहीं होते । यह स्थिति भयावह है। यह संख्या अमेरिका, यूरोप और जापान की तुलना में अधिक है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि नौकरी की तलाश करने वालों में से अनेक युवा विश्वविद्यालय के स्नातक है ।

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इस सप्ताह ही जारी की गई अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने महामारी के आरंभिक प्रभाव से उबरने में शानदार वापसी की है, लेकिन उसका विकास अब ‘‘धीमा है और दबाव को महसूस कर रहा है.।’’ इसमें कहा गया है कि निकट अवधि में ‘‘टीकाकरण में तेजी लाने और संपत्ति क्षेत्र के संकट को समाप्त करने के लिए आगे की कार्रवाई सहित कोविड रणनीति का पुर्नमूल्यांकन, विकास का समर्थन करने वाला होगा.’’

चीन में इससे पहले भी विरोध–प्रदर्शन हुए हैं, जिन्हें ताकत के जोर से दबाया जाता रहा  है । संभावना है कि इस बार भी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की मशीनरी मौजूदा असंतोष को पूरी क्रूरता से दबा दे ।

अनिल तिवारी
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