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काठमान्डू स्थित भारतीय दूतावास द्वारा विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन

 

काठमान्डू 10 जनवरी

भारतीय राजदूतावास, काठमांडू और त्रिभुवन विश्वविद्यालय के केन्द्रीय हिंदी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से दिनांक10.01.2023को दूतावास में विश्व हिंदी दिवस का आयोजन किया गया।भारतीय दूतावास के मिशन उप प्रमुख श्री प्रसन्न श्रीवास्तव और डॉ संजीता वर्मा, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने दूतावास और विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया । श्री मंगल प्रसाद गुप्ता, सांसद एवं अध्यक्ष, हिंदी मंच नेपाल कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे । उन्होंने कहा कि हिंदी ने नेपाल और भारत के सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में अहम् भूमिका निभाई है । उन्होंने  वैश्विक स्तर पर हिंदी के महत्व और अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में इसकी प्रासंगिकता को भी रेखांकित किया।

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कार्यक्रम में भारत के प्रतिष्ठित भाषाविद डॉ. विमलेश कांति वर्मा, नेपाल के वरिष्ठ हिन्दी साहित्यकार एवं विद्वान श्री गंगा प्रसाद अकेला एवं डॉ. राम दयाल राकेश विशिष्ट अतिथि थे। डॉ. विमलेश कांति वर्मा ने अपने संबोधन में हिंदी अनुसंधान पर अपने सुदीर्घ अनुभव, विशेष रूप से इसके इतिहास, अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के साथ इसके संबंध और समकालीन समय में इसके विकास के बारे में अपने विचार साझा किए।

मिशन उप प्रमुख श्री प्रसन्न श्रीवास्तव ने भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस अवसर पर दिए गए संदेश को पढ़ा। उन्होंने टिप्पणी की कि विश्व हिंदी दिवस हमें अपनी भाषाई विरासत और पहचान की याद दिलाता है। उन्होंने नेपाल के सभी हिंदी प्रेमियों, विद्वानों एवं साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने हिंदी के माध्यम से नेपाल-भारत मैत्री को और मज़बूत करने में अपना योगदान दिया है ।

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कार्यक्रम के अंतर्गत काठमांडू के विभिन्न स्कूलों के छात्रों के लिए हिंदी कविता पाठ का आयोजन किया गया जिसमें छात्रों ने ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ विषय पर प्रभावशाली कविता पाठ किया। इस अवसर पर त्रिभुवन विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के एमए के छात्रों को भी सम्मानित किया गया।

स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, काठमांडू के संगीत के छात्रों ने सामूहिक प्रस्तुति दी। स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र की निदेशक डॉ असावरी बापट ने देवनागरी लिपि और इसकी विशेषताओं पर व्याख्यान दिया । त्रिभुवन विश्वविद्यालय की हिन्दी प्राध्यापक डॉ. श्वेता दीप्ति एवं मंचला झा ने अपने संबोधन में नेपाल-भारत के संबंधों में हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डाला।

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कार्यक्रम के दूसरे सत्र में नेपाल-भारत कवि सम्मलेन का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रतिष्ठित कवियों ने हिंदी, उर्दू और नेपाली भाषाओं में कविता पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम का सफल संचालन सत्येन्द्र दहिया जी के द्वारा किया गया ।

 

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