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पोखरा दुर्घटना – बहुत बड़ी क्षति : कंचना झा

 

कंचना झा, काठमांडू, २ माघ–पोखरा अभी अपनी खुशी पूरी तरह से बांट भी नहीं पाया था कि हमारे पास अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल है, हमरा शहर भी एक बड़ा शहर है कि रविवार को हुई दुर्घटना हो गई । इस दुर्घटना के बाद सारी खुशी गम में बदल गई है । पोखरा की खुशी को जैस्ो किसी की नजर लग गई । अभी कुछ ही दिन तो हुए हैं पोखरा अन्तर्राष्ट्रीय विमानस्थल के उद्घाटन को । पोखरा के लोग ही नहीं वरन पूरा नेपाल ही इसमें अपनी अपनी खुश का इजहार कर रहे था कि हमारे पास एक और अंतर्राष्ट्रीय विमानस्थल है ।
लेकिन एक विमान दुर्घटना और जैसे कुछ पल के लिए सबकुछ तबाह । विमान दुर्घटना होने के बाद सभी एक ही बात कह रहे हैं यह क्या और कैसे हो गया ?
७२ लोगों के साथ उड़े प्लेन में से ६८ लोगों का शव मिल चुका है और बांकी४ के भी मिल ही जाएगे । स्थानीय लोगों के अनुसार उन्हें लग रहा था कि शायद कोई घायल अवस्था में या जीवित मिल जाएगा लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ । वरन ६८ शव मिल मिल चुके हैं । लोगों का हाल बेहाल , घर वालों का रोना धोना, और यति एयरलाइन्स के साथ ही सरकार पर सवाल पर सवाल दागे जा रहे हैं । सभी शोक में डूबे हुए हैं । नेपाल के लिए आन्तरिक उड़ान के इतिहास में यह सबसे बड़ी विमान दुर्घटना है ।
बहुत से लोगों का कहना कि विमान में कुछ खराबी थी लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पायलट कमल केसी के नेतृत्व में विमान को उतरने की अनुमति दी जा चुकी थी । तबतक विमान और इसकी उड़ान में किसी तरह की कोई समस्या नहीं थी । फिर ऐसा क्या हुआ होगा कि विमान के पायलट ने रनवे –३० पर उतरने की अनुमति पाने के बाबजूद रनवे –१२ पर उतरने की अनुमति मांगी ।
इन सबमें अच्छी बात एक ही हुई कि दुर्घटना घनी बस्ती में नहीं होकर कम आबादी वाले इलाके में हुई । लोगों का कहना है कि पायलट ने समझदारी दिखाई उसने घनी बस्ती में प्लेन को उतारने की कोशिश नहीं की । पायलट ने अपने तरीके से, अपनी सुझबुझ से एक घनी बस्ती को बचाया और सेती खोंच की ओर प्लेन गिरा ।
फिर यह भी सच था कि रविवार का मौसम साफ था और सभी उड़ाने नियमित थी । वैसे अभी तक हादसे की वजह का पता नहीं चल पाया है अभी कुछ कहना भी गलत ही होगा ।
रविवार को जैसे ही विमान दुर्घटना हुई प्रधानमंत्री प्रचण्ड सहित विश्व समुदाय ने विमान दुर्घटना को लकेर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की । विश्व चिंतित है और क्यों न हो ? इस विमान दुर्घटना में न केवल नेपाल वरन भारत, रुस, कोरिया , आस्ट्रेलिया , आयरलैण्ड , अर्जेन्टिना और फ्रांस के लोग भी शामिल हैं । नेपाल के लिए तो ब्रजपात ही हुआ है । कोराना के कारण धाराशायी हो गई थी यहाँ की पर्यटन । तो पर्यटन क्षेत्र के लिए यह एक बहुत बड़ी क्षति है क्योंकि पोखरा पर्यटक क्षेत्र ही कहलाता है । फिलहाल सरकार ने हादसे के कारण का पता लगाने के लिए एक पांच सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है । अपेक्षा करे कि यह आयोग घटना के सही कारणों का पता लगाएगी और उस कारण के अंत के लिए हर संभव प्रयास करेगी । अभी तक के दुर्घटना के इतिहास को यदि देखा जाए तो उसमें आयोग के प्रतिवेदन में यही कहा जाता है कि मानवीय तुत्रि अर्थात् पायलट की लापरवाही के कारण से दुर्घटना हुई । पायलट जो स्वयं मृत्यु को वरण कर चुका है वह कैसे अपनी सफाई दे ? कि दुर्घटना का कारण विमान स्थल का भौतिक संरचना,भौगोलिक स्थिति, मौसम विमान की अवस्था या अन्य कोई प्राविधिक गड़बड़ी भी हो सकती है ।
लेकिन एक बात तो तय है कि इस दुर्घटना ने सबको हिला के रख दिया है । कहते हैं कि नेपाल का आकाश हवाई उड़ान के लिए सुरक्षित नहीं है । ऐसे में आगे लोगों का डर और भी बढ़ जाता है । पोखरा के साथ साथ सभी को एक डर है कि क्या पोखरा आगे भी इस तरह की घटना से रुबरु होगी ?

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