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ये कैसा बिहार है ??? : आलेख निशांत कुमार

 

निशांत कुमार, बिहार एक राज्य है जो की भारत देश का एक अंग है इसके उत्तर में नेपाल,दक्षिण में झारखंड जो की बिहार से ही अलग हो कर बना है,पूर्व में बंगाल जिसे पश्चिम बंगाल भी कहते है यह भी पहले बिहार का अंग था।बिहार के पूर्व में उत्तर प्रदेश है।बिहार की राजधानी पटना है जिसे पाटलिपुत्र के नाम से भी जाना जाता है। बिहार की मुख्य भाषा भोजपुरी, मगही, मैथिली,और भी कई भाषा बोली जाती है। बिहार में 38 जिले हैं
वर्तमान बिहार:
बिहार का विकास मानो गंगा मैया में समा गई है यहां पहले आप राज्य करिए फिर हम करेंगे फिर दोनो मिल के करेंगे यही चलता है। बिहार का विकास मानो सत्ता पर टिकी हुई है,बिहार में ऐसा नही है की विकास हुआ ही नही है, विकास हुआ है कुछ हदो तक जैसे आप मेरा गांव ही ले लीजिए।मेरा गांव चकथत पूरब पंचायत में आता है मेरे पंचायत में आपको सभी घर से नेता मिल जायेंगे। साथ में आपको बेरोजकर भी मिलेंगे। अभी कुछ गली की सड़क बन गई है। जो भी भ्रष्ट नेताओ और अधिकारियों की बली चढ़ गई है,मानो बिहार है तो भ्रष्टाचार भी है बिहार में कई सरकार आई और बड़े बड़े वादा करके गई। लेकिन बिहार भी रो रहा है इनको देख कर। बिहार को कभी किसी नेता ने लुटा कभी बाढ़ ने दोनो लकड़ी को खाने वाले कीड़े की तरह बिहार को खोखला बना रहे है। ऐसा नहीं है की सब नेता मंत्री ऐसे ही होते है। जैसे की बिहार में शराब बंद है लेकिन आपको जहा चाहिए वही मिलेगा।होम डिलीवरी फ्री जो एक बहुत ही निंदा वाली बात है अगर बिहार में शराब बंद है तो यह आती कहा से है? बॉडर कैसे पार हो जाता है?
दोनो सवाल गंभीर है जो हमारे राज्य के महामहिम श्री नीतीश कुमार जी से पूछने का सबसे बड़ा सवाल कह सकते है। वैसे भी पलटू चाचा को सत्ता कुर्सी बचाने से फुरसत कहा है जो देंगे जवाब। यह जो नेता शब्द जो होता है न बहुत ही खराब होता है। यह लोग लोगो को जाति के नाम पर, धर्म के नाम,बेरोजगारी के नाम पर लोगो को लड़वाते रहते हैं और बिहार के लोग लड़ते भी है और साथ भी रहते है । बिहार की शिक्षा की स्थिति बहुत ही खराब है,बच्चे यहां पढ़ने नहीं खाने आते है जिस से बच्चों को पढ़ने से ज्यादा खाने का मेनू याद रहता है जिसमे भी शिक्षक भी भ्रष्ट हो गए है।यह बच्चो को देने वाला खाना शायद चूहा खाता है की कोई और यह तो चूहा ही बताएगा। ऐसा भी नहीं है की कोई शिक्षक अच्छा नहीं होता और सब बच्चे खाने ही आते है।
जहा बच्चे पढ़ना चाहते है वहा शिक्षक की कमी हैं, जैसे की आज अगर बिहार के विश्वविद्यालय और महाविद्यालय स्थिति सही होती तो शायद ही में यहां होता। शिक्षक को पलटू चाचा शराब खोजने में लगा देते है तो पढ़ाई कहा से होगी। हमारा यह मिट्टी बहुत ही उपजाऊ है। इसने फसल के साथ साथ कई वीर ऐसे दिए है जो अपने देश के लिए कुर्बा हुए,ऐसे कई नेता दिए जिसने अपने इस मिट्टी का नाम अपने देश नहीं अपने देश के साथ अपने बिहार का नाम पूरे विश्व में सर्वाधिक लोकप्रिय किया।
बहुत सी कमी है जो की बताते बताते शायद में खुद शर्मिंदा हो जाऊ।
फिर भी कहते है आइए आप का बिहार में स्वागत है। आइए हमारा राज्य को पहचानिए की कही मैंने कुछ गलत तो नहीं कह दिया। आइए और बताइए मुझे की मैं गलत हूं।

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Nishant kumar

(लेखक- एफ.आई.एम.टी कालेज, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली में पत्रकारिता एवं जन-सचांर कोर्स- प्रथम वर्ष के छात्र हैं।)

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