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हैदराबाद (तेलंगाना) में डॉ रामनिवास ‘मानव’ के सम्मान में ‘कविता की शाम : डाॅ ‘मानव’ के नाम’ कार्यक्रम आयोजित

 

नारनौल। हैदराबाद और सिकंदराबाद की तीन लोकप्रिय संस्थाओं- गीत चांदनी, हिंदी लेखक-संघ और गोलकोंडा दर्पण विचार-मंच के संयुक्त तत्त्वावधान में सुप्रसिद्ध साहित्यकार और शिक्षाविद् डॉ रामनिवास ‘मानव’ के सम्मान में नामपल्ली स्थित हिंदी प्रचार-सभा के सभागृह में ‘कविता की शाम : डॉ ‘मानव’ के नाम’ कार्यक्रम गत दिवस आयोजित किया गया। गोलकोंडा दर्पण पत्रिका के यशस्वी संपादक गोविंद अक्षय के कुशल संचालन तथा गीत चांदनी संस्था के सभापति चंपालाल बैद की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस कार्यक्रम के प्रारंभ में कवयित्री सुधा ठाकुर ने डॉ ‘मानव’ का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करने के साथ उनके बहुआयामी साहित्य के विभिन्न पक्षों के महत्त्व को भी रेखांकित किया। तत्पश्चात् नगर द्वय के हिंदी, उर्दू, तेलुगू और हरियाणवी भाषाओं के एक दर्जन से अधिक कवियों ने काव्य-पाठ किया, जिनमें डॉ ‘मानव’ के अतिरिक्त गोविंद अक्षय, चंपालाल बैद, सुधा ठाकुर, सुरेश गुगलिया, सलादुद्दीन नैयर, दीपक चंडालिया, दुर्गाराज पटून, डी प्रेमराज, अनिलकुमार गुप्ता, लतीफुद्दीन लतीफ, तस्लीम जोहर, शोभा देशपांडे और जाहिद हरियाणवी के नाम उल्लेखनीय हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ ‘मानव’ ने अपने संबोधन में ‘समकालीन परिदृश्य में कविता की प्रासंगिकता’ विषय पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि कविता मानवीय मनोभावों की जीवंत और कलात्मक अभिव्यक्ति है। कविता समय-सापेक्ष ही नहीं, जीवन-सापेक्ष भी होती है और इसीलिए जब तक मनुष्य रहेगा, मनुष्य में भावना और संवेदना रहेगी, कविता भी जीवित रहेगी। डाॅ ‘मानव’ के काव्य-पाठ को भी खूब वाहवाही मिली। उनका यह दोहा बहुत सराहा गया- किसी और की आग है, किसी और का तेल। किसी और की झोपड़ी, किसी और का खेल।। कार्यक्रम के अंत में विभिन्न संस्थाओं द्वारा शॉल, मुक्तक माला और साहित्य भेंट कर डॉ ‘मानव’ को सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि हैदराबाद में डॉ ‘मानव’ के सम्मान में इस प्रकार का कार्यक्रम दूसरी बार आयोजित किया गया था, जिसकी नगर द्वय के साहित्यिक क्षेत्र में काफी चर्चा रही।

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